रोहतांग को लेकर एनजीटी की बड़ी टिप्पणी, फैसला अभी सुरक्षित
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिमाचल के रोहतांग दर्रा में प्रदूषण, सीएनजी व इलेक्ट्रिक बसों को चलाने और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक संबंधी मामलों में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। एनजीटी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ट्रिब्यूनल ने कई आदेश दिए लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। पर्यावरण को बचाने और संरक्षित करने की जरूरत है।
हम इस मकसद में कामयाब नहीं हो रहे। सभी मामलों पर फैसला सुरक्षित किया जाता है। इन मामलों पर जल्द ही आदेश दिया जाएगा। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश से जुड़े इन मामलों पर सुनवाई की। एनजीटी ने रोहतांग दर्रा में मौजूद ग्लेशियरों के पिघलने पर चिंता जाहिर करते हुए कई आदेश दिए थे।
इसके अलावा दर्रा में डीजल-पेट्रोल गाड़ियों के आवागमन को प्रतिबंधित करते हुए व्यावसायिक गतिविधियों पर भी रोक लगा दी थी। टैक्सी एसोसिएशन और कामकाजी महिलाओं की ओर से एनजीटी में याचिकाएं दाखिल की गईं थी। हालांकि ट्रिब्यूनल ने किसी को राहत नहीं दी है।
हाइब्रिड वाहनों के चलने का मामला
एनजीटी ने हाल ही में केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह हिमाचल में हाइब्रिड यानी इलेक्ट्रिक और सीएनजी बस स्टेशन स्थापित करने के लिए राज्य सरकार को फंड मुहैया कराए। वहीं राज्य सरकार हाइब्रिड वाहनों को चलाने की दिशा में काम कर रही है।
ठप है कामकाजी महिलाओं का काम
रोहतांग दर्रा में व्यावसायिक गतिविधियों पर अंकुश लगने के बाद स्थानीय कामकाजी महिलाओं का काम भी ठप है। पर्यटकों को पारंपरिक कपड़े मुहैया कराने वाली महिलाओं ने एनजीटी में याचिका दाखिल कर राहत की मांग की थी।
पैराग्लाइडिंग पर भी है रोक
एनजीटी ने पैराग्लाइडिंग पर भी रोक लगा रखी है। इस संबंध में सरकार की ओर से कहा गया था कि इससे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं हो रहा है। हालांकि बेंच ने इसे मानने से इनकार कर दिया था। बेंच का कहना था कि रोहतांग दर्रा में जितनी गतिविधि बढ़ेगी, पर्यावरण को उतना ही नुकसान होगा।