नौणी विश्वविद्यालय को मिली सफलता: दिल की बीमारियों से बचाएगी विदेश साग की नई किस्म
कृषि विज्ञान केंद्र कंडाघाट ने इसे अपनी जमीन पर तैयार किया है। वहीं कंडाघाट के कुछ किसानों को भी इसे ट्रायल के रूप में दिया था, जिसका सकारात्मक परिणाम निकला है। इसकी कीमत बाजार में 120 से 180 रुपये प्रति किलो रहेगी। अब तक विदेशों में इस साग को उगाया जा रहा था, मगर अब यह प्रदेश में भी तैयार हो सकेगा।
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हिमाचल प्रदेश नौणी विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र ने विदेशी साग (लेटियूस) उगाने में सफलता हासिल की है। यह साग जहां खाने में स्वादिष्ट होता है, वहीं दिल की बीमारियों को दूर करने के लिए सबसे बेहतर माना जा रहा है। इस साग में विटामिन ए है, जो कि एंटी ऑक्सीडेंट का काम करेगा। यह दिल की बीमारियों को जहां दूर करेगी, वहीं इसके नियमित सेवन से वजन भी कम होगा। क्योंकि इससे पाचन शक्ति भी अच्छी होगी। खास बात यह है कि विदेशी साग ठंड के बजाय गर्मियों में ज्यादा अच्छी पैदावार दे रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र कंडाघाट ने इसे अपनी जमीन पर तैयार किया है। वहीं कंडाघाट के कुछ किसानों को भी इसे ट्रायल के रूप में दिया था, जिसका सकारात्मक परिणाम निकला है। इसकी कीमत बाजार में 120 से 180 रुपये प्रति किलो रहेगी।
अब तक विदेशों में इस साग को उगाया जा रहा था, मगर अब यह प्रदेश में भी तैयार हो सकेगा। इस साग की फसल 40 दिन के भीतर तैयार हो जाती है। यह देखने में बैंगनी रंग का है और इसका इस्तेमाल सलाद, बर्गर, सूप समेत अन्य खाद्य वस्तुओं में किया जाता है। हालांकि अभी इसकी खेती छोटे स्तर पर की जा रही है। आने वाले समय में इसके फायदे को देखते हुए इसकी खेती का क्षेत्र भी बढ़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र कंडाघाट की वरिष्ठ वैज्ञानिक सब्जी विभाग सीमा ठाकुर ने बताया कि इस साग में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसके पत्तों में पाया जाने वाला विटामिन ए दिल के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है। यह दिल को मजबूत रखता है। कंडाघाट क्षेत्र के कई किसानों ने भी इस बार इसे ट्रायल आधार पर लगाया था, जो सफल रहा है।