कांगड़ा में पुरानी के सामने बनेगी नई सुरंग, जियोलॉजिकल सर्वे की टीम ने किया दौरा
बहुप्रतिक्षित फोरलेन प्रोजेक्ट मटौर-शिमला के पहले पैकेज को लेकर एनएचएआई ने तेजी से कार्य शुरू कर दिया है। कांगड़ा के समैला में पुरानी टनल के सामने नई सुरंग बनाई जाएगी। जियोलॉजिकल सर्वे की टीम ने गत दिवस टनल निर्माण स्थल का दौरा कर फाइनल रिपोर्ट बना ली है। नई सुरंग की लंबाई 630 मीटर होगी। इसके भीतर वाहन चालकों की सुरक्षा के सभी इंतजाम रहेंगे। पुरानी टनल में सुरक्षा और लाइट के खास इंतजाम नहीं हैं। पुरानी टनल की चौड़ाई और ऊंचाई भी बहुत कम है। वाहन निर्माता कंपनियों के उद्योगों से वाहनों को लेकर कांगड़ा आने वाले मल्टीएक्सल कंटेनर सुरंग में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। सुरंग से पहले ही कंटेनर से वाहन उतारने पड़ते हैं। ऐसी समस्याएं अन्य कारोबारियों को भी पेश आती हैं।
दो वर्ष में मटौर-ज्वालामुखी 40 किमी फोरलेन की 400 करोड़ बढ़ी लागत
देरी के कारण फोरलेन निर्माण की लागत 400 करोड़ यानी 40 फीसदी बढ़ गई है। अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मंत्रालय को बढ़ी हुई लागत की संशोधित डीपीआर भेजी है। पहले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मटौर से ज्वालामुखी तक 40 किमी फोरलेन का अनुमानित खर्च 1000 करोड़ बताया था, जो अब 1400 करोड़ पहुंच गया है। वर्ष 2016 में हमीरपुर दौरे के दौरान तत्कालीन केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी घोषणा की थी। वर्ष 2017 में फोरलेन की अधिसूचना जारी हुई। एनएचएआई ने मटौर से शिमला तक पांच अलग-अलग पैकेज में इस प्रोजेक्ट को बांटा। सबसे पहले मटौर से ज्वालामुखी तक पांचवें खंड के भूमि अधिग्रहण व डीपीआर बनाने का कार्य शुरू हुआ। भूमि अधिग्रहण का कार्य भी 35 फीसदी शेष होना बाकी है। 65 फीसदी से अधिक भूमि का फोरलेन के लिए अधिग्रहण हो चुका है। प्राधिकरण का दावा है कि जनवरी तक पांचवें पैकेज का टेंडर हो जाएगा।
500 भवनों पर चलेगा बुलडोजर
मटौर से ज्वालामुखी तक फोरलेन निर्माण के चलते इसकी जद में 500 भवन आ रहे हैं। भूमि अधिग्रहण और फोरलेन सर्वे में इन भवनों की गिनती हुई है। इसके अलावा सैकड़ों पेड़ों पर भी कुल्हाड़ी चलेगी। अधिकतर पेड़ वन भूमि के अंतर्गत हैं। इसके चलते फॉरेस्ट क्लीयरेंस की फाइल बनाई जा रही है।
मटौर से ज्वालामुखी तक फोरलेन के लिए 65 फीसदी से अधिक भूमि अधिग्रहण हो चुका है। 15 दिसंबर तक टेंडर का लक्ष्य रखा था, लेकिन लागत बढ़ने से संशोधित डीपीआर मंत्रालय को भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जूलॉजिकल सर्वे की टीम ने कांगड़ा के समैला में प्रस्तावित टनल को लेकर दौरान किया है। - योगेश राउत, परियोजना निदेशक, एनएचएआई हमीरपुर