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Himachal News: चिट्टे पर चोट, हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध, निवारण और नियंत्रण विधेयक-2025 विधानसभा में पारित
Fri, 28 Mar 2025 08:53 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 28 Mar 2025 08:53 PM IST
सार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने की ओर से विधानसभा के सदन पटल पर रखा गया हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध विधेयक शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित किया गया।
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हिमाचल विधानसभा शिमला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में अब चिट्टा तस्करों को मृत्युदंड मिलेगा। सरकार ने चिट्टे की तस्करी सहित अन्य अपराधों पर कड़ाई बरतने के लिए हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध, निवारण और नियंत्रण विधेयक 2025 को विधानसभा में पारित कर दिया।
भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने विधेयक को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसे विधानसभा की सिलेक्ट कमेटी को भेजने का सुझाव दिया। जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने विधेयक में खनन सहित अन्य अपराधों को पहले ही जोड़ दिया है। भविष्य में यदि किसी बदलाव की जरूरत होगी तो विधानसभा में ऐसा किया जाएगा। इसके बाद सदन ने सर्वसम्मति से विधेयक को पास कर दिया।
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भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने विधेयक को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसे विधानसभा की सिलेक्ट कमेटी को भेजने का सुझाव दिया। जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने विधेयक में खनन सहित अन्य अपराधों को पहले ही जोड़ दिया है। भविष्य में यदि किसी बदलाव की जरूरत होगी तो विधानसभा में ऐसा किया जाएगा। इसके बाद सदन ने सर्वसम्मति से विधेयक को पास कर दिया।
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विधेयक में किए गए प्रावधानों के तहत चिट्टा तस्करी, नकली शराब बेचने और इस तरह के अन्य संगठित अपराध से यदि किसी की मौत होती है तो दोषियों को आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक मिल सकता है। सजा के साथ दोषी को 10 लाख रुपये तक जुर्माना भी देना होगा। नशे से अर्जित की गई संपत्ति भी जब्त होगी।
विधेयक में संगठित अपराध के लिए उकसाने, प्रयास करने, षड्यंत्र रचने, जानबूझकर अंजाम देने में मदद करने वालों को भी कम से कम एक वर्ष के कारावास का प्रावधान किया गया है जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें पांच लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान है। संगठित अपराध गिरोह के सदस्य को कम से कम एक साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। बीस हजार और अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी देना होगा।
नशे के अलावा अवैध खनन, वन कटान, वन्य जीवों की तस्करी, खतरनाक पदार्थों की डंपिंग, मानव अंगों की तस्करी, स्वास्थ्य विभाग में फर्जी बिल बनाने, झूठे क्लेम करने, साइबर आतंकवाद, फिरौती, फर्जी दस्तावेज रैकेट, खाने की वस्तुओं में मिलावट और मैच फिक्सिंग के मामले भी संगठित अपराध कहलाएंगे।
नशे के अलावा अवैध खनन, वन कटान, वन्य जीवों की तस्करी, खतरनाक पदार्थों की डंपिंग, मानव अंगों की तस्करी, स्वास्थ्य विभाग में फर्जी बिल बनाने, झूठे क्लेम करने, साइबर आतंकवाद, फिरौती, फर्जी दस्तावेज रैकेट, खाने की वस्तुओं में मिलावट और मैच फिक्सिंग के मामले भी संगठित अपराध कहलाएंगे।