ऐसी होगी हिमाचल की नई शिक्षा नीति, होंगे ये 14 बदलाव
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हिमाचल ने राज्य की शिक्षा नीति तैयार कर दी है। पहली से आठवीं कक्षा तक परीक्षा पैटर्न शुरू करना, प्राथमिक स्कूलों में प्री नर्सरी शुरू करना और माध्यमिक कक्षा से व्यावसायिक शिक्षा शुरू करने की सिफारिश की गई हैं। देश की नई शिक्षा नीति को लेकर शनिवार को नई दिल्ली में उत्तर भारत के राज्यों की केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के साथ अहम बैठक होगी।
हिमाचल से बैठक में मुख्य संसदीय सचिव शिक्षा नीरज भारती, अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान और अतिरिक्त सचिव शिक्षा डीसी राणा शामिल होंगे। इस दौरान नई शिक्षा नीति को लेकर हिमाचल का प्रस्ताव रखा जाएगा। सभी राज्यों से प्रस्ताव प्राप्त करने के बाद केंद्र सरकार देश की नई शिक्षा नीति की घोषणा करेगी।
समाज के हर वर्ग से ली राय
नई शिक्षा नीति बनाने के लिए हिमाचल सरकार ने प्रदेश के हर वर्ग से राय ली है। पंचायत, जिला परिषद प्रतिनिधियों के अलावा शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से चर्चा की गई है। इन सभी वर्गों से लिखित राय ली गई है। हिमाचल ने तीस साल बाद बनाई जा रही नई शिक्षा नीति जन सहभागिता से बनाई है।
1986 में बनी थी शिक्षा नीति
1986 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपनी शिक्षा नीति के जरिये शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की पहल की थी। पहली बार तकनीकी शिक्षा का विकास हुआ और एजूकेशन में निजीकरण को बढ़ावा मिला। यहीं से एक बड़ी समस्या भी पैदा हुई।
प्राइवेट स्कूलों और निजी तकनीकी संस्थानों का जाल बढ़ता गया और क्वालिटी एजूकेशन महंगी और सामान्य वर्ग से दूर होती गई। केंद्र सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए नई शिक्षा नीति बनाने का फैसला लिया है। संभावित है कि साल 2016 में नई शिक्षा नीति तैयार होगी।
हिमाचल सरकार ने ये की हैं 14 अहम सिफारिशें
- पहली से आठवीं कक्षा तक परीक्षा पैटर्न दोबारा शुरू हो।
- अंग्रेजी मीडियम को पहली कक्षा से शुरू करना चाहिए।
- प्राथमिक पाठशालाओं में प्री नर्सरी कक्षाएं शुरू हों।
- मिड-डे मील योजना को बंद कर सूखा राशन वितरण हो।
- अध्यापकों की नियुक्तियां एसएमसी की बजाय अधीनस्थ चयन बोर्ड से हों।
- परीक्षाओं में कंपार्टमेंट देने की व्यवस्था को समाप्त किया जाए।
- शिक्षकों का हर साल प्रोफेशनल डेवलपमेंट का कोर्स हो।
- आईसीटी लैब में प्रशिक्षित शिक्षकों और स्टाफ की नियुक्ति हो।
- विज्ञान और गणित विषय को रोचक बनाकर पढ़ाया जाए।
- रट्टा लगाने की प्रथा खत्म हो, सहज ही समझने को प्रोत्साहित करें।
- प्राथमिक स्कूलों में विषय विशेषज्ञ को तैनात किया जाए।
- रूसा को बेहतर बनाने के लिए कॉलेजों-विवि में सामंजस्य होना चाहिए।
- कम से कम दो साल बाद स्कूल, कॉलेजों, विवि में सिलेबस अपडेट हो।
- समय की मांग के अनुसार कॉलेजों में नए-नए कोर्स शामिल किए जाएं।