मलाणा के नाम से बिक रही नेपाल की चरस: एसआर मरडी
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कुल्लू के साथ देश-विदेश में नेपाल से आने वाली चरस को मलाणा की चरस के नाम से बेचा जा रहा है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एसआर मरडी ने कुल्लू में यह बात कही। उन्होंने कहा कि नेेपाल की चरस को मलाणा के नाम से बेचना माफिया व तस्करों के लिए मुनाफे का सौदा है।
मंगलवार को मंडी जोन के पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में कुल्लू समेत पांच जिलों के पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान नशे को रोकना, खनन, वन माफिया, सड़क हादसे और अवैध शराब माफिया पर रोक लगाने के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए।
मरडी ने कहा कि आम चरस के मुकाबले मलाणा चरस का रेट तीन से चार गुना अधिक होता है। बैठक में अनसुलझे हत्या केसों के अलावा किडनैपिंग, पुलिस अधिकारियों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि जोन स्तर पर की जा रही बैठकों में एसएचओ भी भाग ले रहे हैं। इसमें उनको पेश आ रही दिक्कतों का समाधान करना है। एडीजीपी कानून व्यवस्था एसबी नेगी, डीआईजी कपिल शर्मा, एसपी हमीरपुर रमन कुमार
मीणा, एसपी मंडी गुरुदेव शर्मा, एसपी बिलासपुर अशोक कुमार, एसपी लाहौल-स्पीति राजेश धर्माणी, पुलिस अधीक्षक कुल्लू शालिनी अग्निहोत्री, एएसपी कुल्लू राज कुमार चंदेल, डीएसपी संजय शर्मा आदि उपस्थित रहे।
प्रदेश में लगाएं ज्यादा से ज्यादा सीसीटीवी
बैठक में नशे के खात्मे के लिए प्रयास और चरस खेती का क्या विकल्प हो आदि समस्याएं उठाई गईं। डीजीपी ने कहा कि प्रदेश भर में अधिक से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
आपदा से निपटने को होगा एसडीआरएफ का गठन
प्रदेश में भी एसडीआरएफ का गठन किया जा रहा है। डीजीपी मरडी ने कहा कि एसडीआरएफ के गठन से प्रदेश में होने वाली आपदा से जल्द निपटा जा कसेगा। कहा कि पुलिस बिन बुलाए शादियों और मेलों में जाएगी और लोगों को शराब न पीने के लिए जागरूक करेगी। शादियों, मेले में वे लोग बिलकुल शराब न पीएं, जो वाहन चलाते हैं। कहा कि मंडी जोन में कानून व्यवस्था पर अच्छा काम हुआ है। उन्होंने लोगों से 112 नंबर का प्रयोग कर लाभ उठाने की अपील की है।
गाड़ियों की तलाशी करना संभव नहीं
डीजीपी ने कहा कि नशे की तस्करी के लिए नाकों में सभी गाड़ियों की तलाशी करना संभव नहीं है। सूबे में जहां वाहनों की आवाजाही अधिक बढ़ रही है, ऐसे में एक गाड़ी की तलाश करने से लंबा जाम लग जाता है। पुलिस नशे पर नकेल कसने में समर्थ है और सख्ती से इस पर शिकंजा कसा जा रहा है। फिलहाल, भांग की खेती को व्यावसायिक तौर पर नहीं उगाया जा सकता है।