AIIMS Bilaspur: एम्स में दिसंबर से शुरू होगी नवजात गहन चिकित्सा इकाई
फिलहाल प्रदेश में गिने-चुने मेडिकल कॉलेज में ही नवजात गहन चिकित्सा इकाई है। अभी तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेज टांडा, शिमला और नेरचौक में इसकी सुविधा है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर में दिसंबर से एनआईसीयू (नीकू) की सेवाएं मिलना शुरू हो जाएंगी। केंद्र से इस इकाई को शुरू करने के लिए जनवरी में मंजूरी मिली थी। इसके बाद उपकरणों की खरीद के लिए प्रक्रिया शुरू हुई। अब इस इकाई को शुरू करने के लिए एम्स में उपकरण पहुंचना शुरू हो गए हैं। बड़ी बात यह है कि एम्स बिलासपुर में इस इकाई के लिए अत्याधुनिक उपकरण स्थापित होंगे।
फिलहाल प्रदेश में गिने-चुने मेडिकल कॉलेज में ही नवजात गहन चिकित्सा इकाई है। अभी तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेज टांडा, शिमला और नेरचौक में इसकी सुविधा है। नवजात बच्चे के स्वास्थ्य को देखते हुए एनआईसीयू (निकू) में ऐसे कई अत्याधुनिक उपकरण होते हैं जिनकी मदद से बच्चे का इलाज किया जाता है। इनमें शिशु वार्मर, इन्क्यूबेटर्स, फोटोथेरेपी, मॉनिटर, फीडिंग ट्यूब, आईवीएस, रेखाएं वेंटिलेटर मुख्य हैं। अस्पताल में बीमार या समय से पहले जन्मे बच्चे की देखभाल के लिए यह इकाई होती है।
नवजात के लिए एनआईसीयू जरूरी
जब कोई बच्चा समय से पहले जन्म लेता है तो उसे बाहर आकर कई परेशानियां होती हैं। इनमें प्रीटर्म बेबी, जिनके जन्म में समस्या आई हो या कोई जन्म विकार हो, उनके लिए सांस लेना, खाना जैसी चीजें मुश्किल हो जाती हैं। ऐसे नवजात शिशुओं को स्पेशल केयर में रखा जाता है जिसे एनआईसीयू कहते हैं।
एम्स में नवजात गहन चिकित्सा इकाई के लिए उपकरण आना शुरू हो गए हैं। इन्हें स्थापित करने और उपकरणों को पहुंचने में तीन माह का समय लगेगा। दिसंबर से एम्स में नवजात बच्चों को एनआईसीयू की सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। - डॉ. दिनेश वर्मा, एमएस एम्स बिलासपुर