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लापरवाही की हद : एचपीयू शिमला ने 2016-17 के डिप्लोमा भी नहीं दिए
Mon, 01 Nov 2021 01:47 AM IST
Krishan Singh
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 01 Nov 2021 01:47 AM IST
सार
विश्वविद्यालय और इसके तहत कार्यरत पीजी कॉलेज धर्मशाला की लापरवाही ही हद देखिए कि वर्ष 2016-17 के डिप्लोमा तक विद्यार्थियों को नहीं दिए हैं। पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन डिप्लोमा कोर्स तो करवा दिए गए, मगर इन्हें देने की जरूरत ही नहीं समझी गई।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और इसके तहत कार्यरत पीजी कॉलेज धर्मशाला की लापरवाही ही हद देखिए कि वर्ष 2016-17 के डिप्लोमा तक विद्यार्थियों को नहीं दिए हैं। पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन डिप्लोमा कोर्स तो करवा दिए गए, मगर इन्हें देने की जरूरत ही नहीं समझी गई। यह मामला राज्य सूचना आयोग ने उजागर किया है। आयोग ने हैरानी जताते हुए यह मामला सचिव शिक्षा और प्रदेश विश्वविद्यालय के शिक्षा सचिव के ध्यान में लाया है। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान के कोर्ट में कांगड़ा निवासी विनीत चड्ढा ने एक अपील की।
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इसमें उन्होंने आयोग के ध्यान में यह तथ्य लाया कि राजकीय स्नातकोत्तर कॉलेज धर्मशाला में उन्होंने वित्तीय वर्ष 2017-18 में पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन में एडवांस डिप्लोमा कोर्स किया, पर आज तक इसका प्रमाणपत्र नहीं मिला। उन्होंने इस संबंध में आरटीआई के आवेदन और दायर प्रथम अपील पर जवाब नहीं दिया। आवेदनकर्ता विनीत ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से कॉलेज गए और उन्हें कोई सूचना नहीं मिली। एक और आरटीआई आवेदन में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सहायक रजिस्ट्रार (परीक्षा) ने कहा कि उनके प्रमाणपत्र या डिप्लोमा से संबंधित मामला संबंधित कॉलेज के समक्ष उठाया गया है। इस बारे में पीजी कॉलेज धर्मशाला के अधीक्षक संजीव कटोच ने आयोग को बताया कि वह विश्वविद्यालय से लगातार संपर्क में हैं और इस मामले का अगले दो सप्ताह में समाधान कर दिया जाएगा।
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राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान ने अपने फैसले में हैरानी जताते हुए कहा कि फाइल बताती है कि पीजी कॉलेज धर्मशाला और सहायक रजिस्ट्रार परीक्षा ने तो वर्ष 2016-17 के डिप्लोमा भी उपलब्ध नहीं करवाए हैं। उन्होंने कहा कि इस तथ्य को सचिव शिक्षा और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ध्यान में लाना उपयुक्त होगा। इस संबंध में आदेश की प्रति भी दोनों अधिकारियों को भेजी गई है। यह भी आदेश जारी किए गए हैं कि अगर आवेदक को दो सप्ताह के भीतर डिप्लोमा नहीं दिया जाता है तो आवेदक आयोग के पास सूचना को अपने पास रोके रखने पर आयोग के समक्ष पेनल्टी लगवाने के लिए संपर्क कर सकता है।
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