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...तो इस वजह से बढ़ रही हैं आलू की कीमतें

Sun, 02 Nov 2014 10:02 AM IST
Updated Sun, 02 Nov 2014 10:02 AM IST
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National Seminar on potato research in CPRI shimla

भारत में आलू की कीमतें कम पैदावार की वजह से बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन का भी आलू की पैदावार पर बुरा असर पड़ रहा है। इंटरनेशनल पोटेटो सेंटर (सीआईपी) के साउथ, वेस्ट एंड सेंट्रल एशिया के क्षेत्रीय कार्यालय के पोटेटो लीडर डॉ. एमएस कादियान ने कहा कि 2012-13 के मुकाबले 2013-14 में आलू की पैदावार लगभग 15 फीसदी कम रही है। 2012-13 में देश में आलू का उत्पादन लगभग 41.31 मिलियन टन हुआ था।

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डॉ. कादियान केंद्रीय आलू अनुसंधान केंद्र (सीपीआरआई) शिमला में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार के पहले दिन संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 2013-14 में फरवरी और मार्च में लगातार बारिश से किसानों को खेतों से समय पर आलू की फसल निकालने का मौका ही नहीं मिला। बड़ी मात्रा में आलू खेतों में पड़ा-पड़ा सड़ गया और रोगग्रस्त हो गया। स्टोरों में भी यह पहुंच नहीं पाया। ये हालात पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रहे हैं। मांग अधिक और आपूर्ति कम होने से आलू की कीमतें नीचे नहीं उतर रही हैं। जालंधर के प्रतिनिधि किसान जंग बहादुर सिंह सांगा ने कहा कि पैदावार के बारे में सही जानकारी नहीं होना भी कीमतें बढ़ने का कारण है। सरकार को इसमें एक्यूरेसी लाने की जरूरत है।
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आलू प्रोसेसिंग में भारत आस्ट्रेलिया से बहुत पीछे
आलू की प्रोसेसिंग में भारत बहुत पीछे है। प्रोसेसिंग कंपनी पेप्सिको के प्रतिनिधि निखिल टंडन ने कहा कि देश में आलू की लगभग सात प्रतिशत प्रोेसेसिंग होती है। 93 प्रतिशत आलू तो सब्जियों या दूसरे खाद्य पदार्थों में खाने मेें इस्तेमाल होता है। हाल के सर्वेक्षणों से ये तथ्य सामने आए हैं। आस्ट्रेलिया से आए सिमलॉट आस्ट्रेलिया लिमिटेड के बायोसाइंस मैनेजर मार्क हीप ने कहा कि आस्ट्रेलिया में 53 प्रतिशत आलू की प्रोसेसिंग होती है। डॉ. एमएस कादियान ने कहा कि इसका कारण भारत में प्रोसेसिंग वाले आलू की कम पैदावार है।

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आधुनिक तकनीकों से बढ़ा सकते हैं पैदावार: उर्मिला

National Seminar on potato research in CPRI shimla

राज्यपाल उर्मिला सिंह ने शनिवार को इंडियन पोटेटो एसोसिएशन और केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला के संयुक्त तत्वावधान में ‘इमरजिंग प्रोब्लेम्ज ऑफ पोटेटो’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू की। राज्यपाल ने आलू उत्पादन में चुनौतियों से निपटने के लिए सघन अनुसंधान पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आलू के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आईसीएआरआई के उप महानिदेशक एनके कृष्णा कुमार ने की। अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान नई दिल्ली के क्षेत्रीय निदेशक डा. जुलियन पार और भारत सरकार के उद्यान आयुक्त डॉ. एसके मल्होत्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। आईसीएआर-सीपीआरआई के निदेशक डॉ. बीर पाल सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया। आईपीए के सचिव डॉ. एनके पांडे ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इनको किया सम्मानित

राज्यपाल ने डॉ. जीवनलता, डॉ. रवींद्र, डॉ. बास्वराज, डॉ. एसके चक्रवर्ती और डॉ. बीरपाल सिंह को ‘आईपीए कौशल्या पुरस्कार’ से सम्मानित किया। पुरस्कार के तौर पर उन्हें प्रशस्ति पत्र और 20,000 रुपये नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। उन्होंने आलू अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए डॉ. जगेश तिवारी को 10 हजार रुपये का ‘चंद्रप्रभा युवा वैज्ञानिक पुरस्कार’ भी प्रदान किया।

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