National Mushroom Fair: देश में तीन गुना बढ़ा मशरूम उत्पादन और कारोबार, राष्ट्रीय मेले में हुआ खुलासा
2018 में 1.29 जबकि अब 2.86 लाख मिट्रिक टन विभिन्न किस्मों की मशरूम तैयार की जा रही है। इसका खुलासा खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट में 26वें राष्ट्रीय मशरूम मेले के दौरान हुआ है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश में पिछले तीन वर्षों में मशरूम उत्पादन और कारोबार तीन गुना बढ़ा है। 2018 में 1.29 जबकि अब 2.86 लाख मिट्रिक टन विभिन्न किस्मों की मशरूम तैयार की जा रही है। इसका खुलासा खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट में 26वें राष्ट्रीय मशरूम मेले के दौरान हुआ है। कोविड के बीच दो वर्ष मेले का आयोजन ऑनलाइन किया गया था। यह मेला सोलन शहर को मशरूम सिटी ऑफ इंडिया घोषित करने के उपलक्ष्य पर हर वर्ष मनाया जाता है। इस मौके पर पूर्व सांसद एवं अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र कश्यप ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। खुंब निदेशालय के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि तीन वर्षों में मशरूम उत्पादन और कारोबार तीन गुना बढ़ा है।
उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों के लिए मशरूम की प्रजातियां एवं तकनीकों को विकसित करने के लिए खुंब अनुसंधान निदेशालय की प्रशंसा की। उन्होंने देश के किसानों को इस उभरते हुए उद्योग को अपनाने का आह्वान किया। मेले में देश भर से करीब 1,200 किसान, वैज्ञानिक और मशरूम ग्रोवरों ने भाग लिया। इस मौके पर देश के विभिन्न राज्यों से चयनित छह मशरूम उत्पादकों को प्रगतिशील मशरूम उत्पादक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें बिहार की एक किसान महिला पुष्पा झा भी शामिल रहीं। पुष्पा ने मिल्की, बटन और ऑस्टर मशरूम का डीएमआर से प्रशिक्षण लेने के बाद अपने क्षेत्र में महिलाओं को मशरूम का प्रशिक्षण देकर 500 महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है।
पराली पर तैयार कर रहे मशरूम
असम के नलबरी जिला के हैमानटा नाथ ने डीएमआर सोलन से दस साल पहले प्रशिक्षण लिया था। अब वह असम में ढिंगरी और बटन मशरूम को पराली और खेतों के अवशेषों पर तैयार कर रहे हैं। वह अपने जिला के किसानों को भी मशरूम उत्पादन के साथ जोड़ रहे हैं। उनके साथ अब 400 किसान मशरूम तैयार कर रहे हैं।
150 लोगों को दिया रोजगार
अरुणाचल प्रदेश के अनिल पिगू मिल्की, ढिंगरी मशरूम तैयार कर रहे हैं। वह पिछले बीस वर्षों से मशरूम उगा रहे हैं। डीएमआर सोलन से ही उन्होंने मशरूम का प्रशिक्षण लिया था। अरुणाचल प्रदेश में 150 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया और अपना मशरूम फार्म तैयार कर वहां उन्हें रोजगार से भी जोड़ा है।
खाद बनाने का दे रहे प्रशिक्षण
हिमाचल फागू के संजीव कालिया बटन मशरूम के साथ खाद भी तैयार कर रहे हैं। प्रदेश भर में करीब 300 किसानों को उन्होंने अपने फार्म के साथ जोड़ा है। वह उन्हें प्रशिक्षण देने के साथ खाद बनाने की तकनीक भी बता रहे हैं।
अपना फार्म किया तैयार
सोनीपत हरियाणा के राजेश एंटील बटन मशरूम तैयार कर रहे हैं। डीएमआर से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपना फार्म तैयार किया है। इसमें एक साथ बीस हजार बैग मशरूम तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने 1,300 किसानों को प्रशिक्षण दिया है जबकि 50 बेरोजगारों को अपने फार्म में रोजगार दिया है।
मशरूम के अवशेषों से तैयार कर रहे वर्मी खाद
छत्तीसगढ़ के सौरभ ढिंगरी मशरूम तैयार कर रहे हैं। बाजार में ढिंगरी के कम दाम मिलने पर उन्होंने ढिंगरी मशरूम को सुखाकर उसका पाउडर तैयार कर कई खाद्य वस्तुएं तैयार की हैं। इसके अलावा वह बटन मशरूम का आचार, प्रोटीन पाउडर समेत अन्य कई वस्तुएं बना रहे हैं। मशरूम के अवशेषों से वर्मी कंपोस्ट भी तैयार कर रहे हैं।