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रोहतांग दर्रा: एनजीटी ने हिमाचल सरकार से मांगा जवाब

Wed, 25 Nov 2015 10:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 25 Nov 2015 10:42 PM IST
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National green tribunal seeks himachal govt response on rohtang case.

रोहतांग दर्रा तक सभी तरह की व्यावसायिक और अन्य गतिविधियों पर रोक का खामियाजा स्थानीय कामकाजी महिलाओं की आजीविका पर पड़ रहा है। दर्रा के आसपास इलाकों में दर्शकों से अपने परिवार की आजीविका चलाने वाली इन महिलाओं ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दाखिल कर गुहार लगाई है कि उन्हें रोजगार शुरू करने की अनुमति फिर दी जाए।

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कहा कि उनके काम से किसी तरह का पर्यावरण प्रदूषण नहीं हो रहा है। एनजीटी ने याचिका पर विचार के बाद हिमाचल सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ मामले की सुनवाई कर रही है।

पंचांग, कोठी, सोलांग, कुलांग, रूअर गांव की महिलाओं की ओर से प्रसार महिला मंडल ने याचिका दाखिल की है। एडवोकेट भक्ति परसीजा सेठी ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में इस मामले को उठाया है। एडवोकेट सेठी ने कहा कि ये महिलाएं पीढ़ियों से पर्यटकों को किराये पर सामान मुहैया कराकर अपनी आजीविका चलाती हैं। इससे किसी तरह का पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता है। ऐसे में सभी तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध से इनकी आजीविका पर खतरा पैदा हो गया है।
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पारंपरिक ड्रेस मुहैया कराती हैं महिलाएं-
वशिष्ठ से लेकर रोहतांग दर्रा तक की दूरी 51 किमी है। ये महिलाएं पर्यटकों को पर्यटन संबंधी सामान मुहैया कराकर अपनी आजीविका चलाती थीं। ये महिलाएं पर्यटकों को पारंपरिक ड्रेस, स्नो ड्रेस, घूमने के लिए छड़ी किराये पर मुहैया करवाती हैं। पर्यटक स्थानीय लोक रंग में सज-धजकर तस्वीरें खिंचवाते हैं।

खासतौर से मई से नवंबर में रोहतांग दर्रे के आसपास इलाके बर्फ से ढक जाते हैं। ऐसे में पर्यटकों को भी यह सीजन लुभाता है। सभी तरह की गतिविधि पर अंकुश लगने से ये महिलाएं लाचार हो गई हैं। इन महिलाओं का थरमस में पर्यटकों को चाय पिलाना, घोड़े पर पर्यटक को बिठाकर घुमाना जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं।

अटका है अभी तक पुनर्वास-
अभी इन महिलाओं को न तो पुनर्वास योजना का लाभ मिला है न ही सरकार से कोई मदद की गई है। 16 जुलाई को एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि वशिष्ठ से लेकर रोहतांग दर्रा के बीच प्रतिबंध आदेश से प्रभावित हुए सभी स्थानीय लोगों के लिए सरकार राहत और पुनर्वास कार्यक्रम की योजना तैयार कर पेश करे। कुल्लू के डीसी ने छह अगस्त को एक पत्र भी जारी किया था। इसके बाद भी अभी तक इस पर कोई काम नहीं हो सका है।

मनाली, सोलांग में भी पर्यटन रोजगार पर प्रतिकूल असर-
याचिका के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में मनाली और सोलांग क्षेत्र भी प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। सालाना यहां करीब 30 लाख पर्यटक आते हैं। साथ ही आने वाले अधिकांश पर्यटक रोहतांग दर्रा जाने की इच्छा रखते हैं। ऐसे में ज्यादातर स्थानीय आबादी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पर्यटन से जुड़ी हुई है। फैसले से इन पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।


एनजीटी ने जुलाई में लगाया था प्रतिबंध-
एनजीटी ने 6 जुलाई 2015 को वशिष्ठ से लेकर रोहतांग दर्रा तक पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिये सभी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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