एक तरफ तिरंगा यात्रा, दूसरी तरफ राष्ट्रीय ध्वज का होता रहा अपमान
- अनुराग ठाकुर ने निकाली थी तिरंगा यात्रा, उधर रिज पर लहराता रहा फटा तिरंगा
- दिनभर फटा हुआ तिरंगा लहराता रहा, नहीं गई किसी जिम्मेदार की नजर
- अमर उजाला के सवाल पूछने पर देर रात बदला गया राष्ट्रीय ध्वज
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राजधानी शिमला में तिरंगे के सम्मान में जहां भाजयुमो तिरंगा यात्रा निकाल रहा था। वहीं रिज मैदान में लगे 100 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज का सबकी आंखों के सामने अपमान हो रहा था। फटा हुआ राष्ट्रीय ध्वज पूरे दिन रिज मैदान के सौ फीट ऊंचे पोल पर लहराता रहा लेकिन किसी जिम्मेदार की उसपर नजर नहीं गई।
देर रात जब अमर उजाला ने उपायुक्त शिमला से इस संबंध में बात की तो आनन फानन में उसे बदल दिया गया। जिस राष्ट्रीय ध्वज की रक्षा के लिए सेना के जवाब अपनी जान कुर्बान कर देते हैं। उसी राष्ट्रीय ध्वज की मजह देखरेख करने का जिम्मा भी शिमला नगर निगम सही से नहीं निभा पा रहा। हालात यह है कि करीब एक साल पहले रिज मैदान में सौ फीट ऊंचे पोल पर लगाए गए तिरंगे का रखरखाव भगवान भरोसे है।
इसी का नतीजा रहा कि शिमला में शनिवार को पूरे दिन फटा हुआ तिरंगा उस पोल पर लगा रहा लेकिन किसी भी अधिकारी की उस पर नजर नहीं गई। यह तब था जब इसी शहर में भाजयुमो तिरंगा यात्रा निकाल रही थी। देर शाम जब अमर उजाला ने उपायुक्त शिमला रोहन ठाकुर से इस मामले में पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने इसे चूक तो माना लेकिन किसी पर कार्रवाई करने की बात से इंकार किया।
आनन फानन में देर रात बदल दिया राष्ट्रीय ध्वज
उपायुक्त ने कहा कि मंशा देखने के बाद ही इस संबंध में कोई कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने नगर आयुक्त शिमला को झंडा बदलने के निर्देश दिए जिसके बाद आनन फानन में देर रात झंडे को बदल दिया गया।
लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर झंडे का सम्मान करने में नगर निगम सक्षम नहीं है तो फिर महज राजनेताओं को खुश करने के उद्देश्य से क्यों लगाया जाता है।
नगर निगम के जिम्मे है रखरखाव- शिमला के रिज मैदान में पिछले साल नगर निगम ने सौ फीट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया था। सीएम वीरभद्र सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। वर्तमान में इसके रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम शिमला के पास है।
क्या कहता है नियम- राष्ट्रीय ध्वज, संविधान व राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह के सम्मान को बरकरार रखने के लिए केंद्र सरकार ने प्रिवेंशन आफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 बनाया। इसके तहत राष्ट्रीय ध्वज का सार्वजनिक जगह पर अपमान या उसे नुकसान पहुंचाने पर अधिकतम तीन साल का कारावास या जुर्माना या फिर दोनों हो सकता है।