हिमाचल: म्यूरेट ऑफ पोटाश की कमी के बीच बिक रही अप्रमाणित ‘ऑर्गेनिक पोटाश’
म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद को जॉर्डन और इस्राइल के बीच डेड सी से मंगवाया जाता है। इसे इंडियन पोटाश लिमिटेड मंगवाता है। इंडियन पोटाश लिमिटेड इसे प्रदेश को उपलब्ध नहीं करवा पाया है।
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केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय के उपक्रम इंडियन पोटाश लिमिटेड की ओर से उपलब्ध करवाई जाने वाली म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद की कमी के बीच निजी कंपनियों की ‘ऑर्गेनिक पोटाश’ इन दिनों धड़ाधड़ बिक रही है। हिमफेड के डिपो में भी एक निजी कंपनी की ऐसी ही अप्रमाणित खाद बेची जा रही है। इस खाद के बैग में इसे गुड़ या खांड से पोटाश निकालने के दावे किए जा रहे हैं। इसकी गुणवत्ता पर भी संदेह किया जा रहा है।
म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद को जॉर्डन और इस्राइल के बीच डेड सी से मंगवाया जाता है। इसे इंडियन पोटाश लिमिटेड मंगवाता है। इंडियन पोटाश लिमिटेड इसे प्रदेश को उपलब्ध नहीं करवा पाया है। इसका जनवरी अंत में ऑर्डर भेजा गया है। यह खाद सेब बगीचों में फरवरी के पहले और दूसरे सप्ताह में डाली जाती है। यह बगीचों की मिट्टी में घुलने में 45 दिन से ज्यादा वक्त लगाती है। इसकी सेब पेड़ों की कली, फूल, फल का आकार और रंग में भी बड़ी भूमिका रहती है। बागवान हिमफेड के डिपो से पोटाश खाद मांग रहे हैं तो उन्हें एक निजी कंपनी की ‘ऑर्गेनिक पोटाश’ का विकल्प सुझाया जा रहा है। इसका 50 किलो का बैग 850 रुपये तक बेचा जा रहा है। म्यूरेट ऑफ पोटाश एक तो उपलब्ध नहीं है, दूसरा इसका रेट भी 1050 से बढ़ाकर 1700 रुपये किया गया है।
बागवानों को दी जा रही ऑर्गेनिक पोटाश की जांच हो : चौहान
हिमाचल प्रदेश फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि म्यूरेट ऑफ पोटाश की जगह हिमफेड के डिपो में ऑर्गेनिक पोटाश बेची जा रही है। इसकी बागवानी विश्वविद्यालय में जांच होनी चाहिए कि यह सही है कि नहीं। म्यूरेट ऑफ पोटाश तुरंत भेजी जानी चाहिए।
वैकल्पिक खाद की खरीद के लिए बागवानों को बाध्य नहीं किया जा रहा है। यह सेब बागवानों पर छोड़ा गया है कि वे इसे खरीदना चाहें तो खरीद सकते हैं। यह खाद फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर के तहत नहीं आती है। इसके मानक तय नहीं होते हैं। बागवानों को समझाया जा रहा है कि ये ऑगेनिक है। गाय के गोबर की तरह ये भी ऑर्डर के तहत नियंत्रित नहीं है। - जीएस नेगी, प्रबंध निदेशक, हिमफेड, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल में कल आएगी इफ्को की यूरिया खाद
प्रदेश में सोमवार से इफ्को यूरिया खाद की सप्लाई शुरू होगी। रविवार को बरेली से हिमाचल के लिए यूरिया खाद की करीब 59 हजार 154 बोरियां होशियारपुर पहुंचेंगी। इसके बाद खेप मांग के हिसाब से अलग-अलग क्षेत्रों में भेजी जाएगी। किसानों की मांग पूरी हो जाएगी और फसलों में समय से इसका छिड़काव हो पाएगा।
बीते दिनों हिमफेड ने यूरिया खाद पूरे प्रदेश के लिए भेजी थी। कई किसानों की जरूरत तो पूरी हो गई, लेकिन अभी भी कई जगह खाद की मांग की जा रही है। खाद की मांग करने वालों में अधिकतर बड़े किसान हैं, जिन्हें 30 से 50 बोरियों की जरूरत रहती है। इस समय एक आधार कार्ड पर यूरिया खाद की दो बोरियां मिल रही हैं। इससे अधिक जरूरत वाले किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल रही है।
शनिवार को ऊना के पंडोगा गांव की सोसायटी में खाद की 300 बोरियां पहुंचीं। कुछ ही घंटों में यह खेप खत्म हो गई। कई किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। इफ्को खाद की खेप जनवरी के अंत में आई थी। यह हफ्ते में खत्म हो गई। 21 फरवरी को नई खेप आने से सूबे के सैकड़ों किसानों को राहत मिलेगी। उधर, इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक भुवनेश पठानिया ने बताया कि रविवार शाम को प्रदेश के लिए खाद की खेप होशियारपुर पहुंच जाएगी। 21 फरवरी को इसे मांग के अनुसार आवंटित किया जाएगा। संवाद
हिमफेड की खाद से सस्ती है इफ्को की यूरिया
किसान इफ्को की यूरिया खाद को तरजीह देते हैं। इसकी मुख्य वजह दोनों की कीमत में अंतर माना जाता है। हिमफेड की खाद लगभग 290 रुपये में एक बोरी मिलती है, जबकि इफ्को की यूरिया 267 रुपये में बोरी मिलती है।