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लोकसभा से लेकर विधानसभा तक गूंजा अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली/धर्मशाला
Updated Tue, 09 Dec 2014 10:08 AM IST
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लोकसभा से लेकर हिमाचल विधानसभा तक अमर उजाला की गूंज सुनाई दी। सोमवार को जन प्रतिनिधियों ने संसद और विधानसभा में अमर उजाला में छपी खबरों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरा।
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लोकसभा में मंडी के सांसद राम स्वरूप शर्मा ने जहां हिमाचल से सटी चीन सीमा पर सड़कों का मसला उठाया, वहीं विधानसभा में वन मंत्री के क्षेत्र में 101 पेड़ों के कटने और अंडों में सुई चुभोकर दुर्लभ परिंदों का मारे जाने की खबरें गूंजीं। अमर उजाला ने इन मसलों को हाल ही में प्रमुखता से उठाया था।
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चीन बॉर्डर से सटी सड़कों को तुरंत मिले हरी झंडी
मंडी के सांसद राम स्वरूप ने संसद में शून्य काल में चीन अधिकृत तिब्बत से सटी सामरिक महत्व की पांच सड़कों पर वन विभाग का अड़ंगा लगाने का मामला उठाया। उन्होंने अमर उजाला की खबर का हवाले देकर लोकसभा में केंद्र सरकार से इन सड़कों को युद्ध स्तर पर शुरू किए जाने की मांग की।
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सांसद ने कहा कि इन सड़कों से सेना की रसद खाद्य सामग्री तिब्बत बॉर्डर तक पहुंचाई जाती है। 2006 में चीन से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में 72 सड़कों के निर्माण के लिए प्रस्तावित मंजूरी मिली, लेकिन 2010 तक केवल 9 ही सड़कें पूरी हुईं। इनके निर्माण में पर्यावरण मंजूरी न मिलना और प्रशासनिक शिथिलता सबसे बड़ी बाधाएं हैं।
उन्होंने लोकसभा में बताया कि सीमा पर चीन का विस्तृत एवं मजबूत आधार ढांचा देखकर इस क्षेत्र के लोग हीन भावना से ग्रसित होते जा रहे हैं। अमर उजाला ने 30 नवंबर, 2014 को चीन बॉर्डर से सटी सड़कों पर अड़ंगा शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें उन सड़कों का हवाला दिया गया जो फोरेस्ट क्लीयरेंस के पेंच के कारण फंसी हैं।
जनजातीय क्षेत्रों के लिए सेटेलाइट सुविधा मांगी
जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति, पांगी और किन्नौर भारी बर्फबारी में शेष विश्व से कट जाता है। यातायात और दूरसंचार सेवाएं ठप हो जाती हैं। सांसद ने केंद्र सरकार से विशेष बजट के तहत जनजातीय क्षेत्रों में सेटेलाइट सेवा प्रदान करने की मांग की।
विधाक रविंद्र रवि ने विधानसभा में लहराई अमर उजाला
विधानसभा शीत सत्र के तीसरे दिन सदन में अमर उजाला की खबरों की गूंज सुनाई दी। वन कटान के मसले पर जारी बहस के दौरान भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने अमर उजाला अखबार को सदन में लहराते हुए सवाल उठाया कि वन मंत्री के चुनाव क्षेत्र में हुए कटान में 10 नहीं बल्कि 101 पेड़ों का कत्ल हुआ है और इस बारे में अब एफआईआर दर्ज की गई है। 8 दिसंबर के अंक में ये खबर प्रकाशित हुई थी।
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने भी सवाल उठाया कि वन कटान के मसले सदन में उठाए जाने के बाद से सबूतों को मिटाने का सिलसिला शुरू हो गया है और सरकार कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं। उन्होंने अमर उजाला की एक अन्य खबर का हवाला देते हुए कहा कि शिमला में पक्षियों के अंडों में सुई चुभोकर मारने की घटना भी चिंताजनक है। ये सब वन मंत्री के महकमों में ही क्यों हो रहा है?
हालांकि जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि वन कटान को लेकर सरकार पहले ही सदन में चर्चा करवा चुकी है। जो नए तथ्य इसमें सरकार के सामने आए हैं, उन पर भी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर इस मसले को ऐसे पेश कर रहा है, जैसे सरकार कुछ भी करने को तैयार नहीं। जबकि सरकार ने ही नियम 130 के तहत विपक्ष की ये चर्चा सदन में करवाई।