जिंदा जली थी बहू, मां-बेटे के जेल में बीतेंगे दस साल
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हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने वाले मां और बेटे को 10-10 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए यह सजा सुनाई। मामले के अनुसार संजय कुमार की शादी वर्ष 2004 में रीता देवी से हुई थी।
संजय दिल्ली में एक पेट्रोल पंप में काम करता था। शादी के तीन साल बाद रीता देवी की सास गायत्री देवी और पति संजय कुमार दहेज के लिए तंग करने लगे। कांगड़ा में थुरल के रहने वाले इन लोगों से तंग आकर रीता ने 19 अक्तूबर 2008 को खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आत्महत्या कर ली। मामला दर्ज होने के पश्चात तीनों दोषियों के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कांगड़ा स्थित धर्मशाला के समक्ष मुकदमा चलाया गया।
सेशन कोर्ट ने कर दिया था बरी
18 नवंबर, 2011 को सेशन कोर्ट ने दोनों दोषियों को निर्दोष ठहराया। सरकार ने इस फैसले के खिलाफ वर्ष 2012 में हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का विश्लेषण करने पर पाया कि दोनों ने मिलकर रीता देवी को मरने के लिए विवश किया।
गायत्री देवी ने कोर्ट से अपनी 65 वर्ष की उम्र का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई थी। इसे कोर्ट ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि जिन परिस्थितियों में रीता की मौत हुई, उन्हें देखते हुए सजा में नरमी नहीं बरती जा सकती। संजय कुमार ने भी दो बच्चियों के भरण-पोषण का हवाला देते हुए कम सजा करने की गुहार लगाई थी। इसे भी कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।