हिमाचल: पर्यावरण मंजूरी नहीं मिलने से फंसे खनन लीज के 100 से अधिक मामले
खनन लीज स्वीकृत न होने से क्रशरों को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा, जिससे प्रदेश सरकार को 50 करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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पर्यावरण मंजूरी नहीं मिलने से हिमाचल प्रदेश में खनन लीज के 100 से अधिक मामले लटक गए हैं। खनन लीज स्वीकृत न होने से क्रशरों को कच्चा माल नहीं मिल पा रहा, जिससे प्रदेश सरकार को 50 करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने यह मामला मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समक्ष उठाया है। मामला सुलझाने के लिए अब 5 फरवरी को अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग आरडी नजीम इस मामले पर संबंधित अधिकारियों की बैठक ले रहे हैं और 10 फरवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई है।
बैठक में संबंधित अधिकारियों से मंजूरी न देने की वजह पूछी जाएगी और जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर खनन लीज जारी करने के निर्देश दिए जाएंगे। बीते करीब एक साल से पर्यावरण मंजूरी न मिलने के कारण खनन लीज के मामले लटके हुए हैं। खनन लीज से प्रदेश सरकार ने सालाना 400 करोड़ की आय का लक्ष्य रखा है। बीते वित्त वर्ष में सरकार को करीब 340 करोड़ की आय हुई थी। अगर सरकार खनन लीज को मंजूरी दे देती है तो इस वित्त वर्ष में 400 करोड़ की आय का लक्ष्य प्राप्त हो सकता है।
पर्यावरण मंजूरी न मिलने से प्रदेश में 100 के करीब लीज अटकी हुई हैं। मुख्यमंत्री को समस्या से अवगत करवाया है। लीज जारी होती है तो सरकार को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के साथ बैठक कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है।- हर्षवर्धन सिंह चौहान, उद्योग मंत्री
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