फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Mobile phone towers will be installed only on buildings with approved maps, structural safety certificate

Mobile Phone Towers: स्वीकृत नक्शों, स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट वाले भवनों पर ही लगेंगे मोबाइल फोन टावर

Tue, 23 Aug 2022 11:21 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 23 Aug 2022 11:21 AM IST
सार

 सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने टावर लगाने वाली राइट ऑफ वे पॉलिसी 2021 संशोधित कर दी है। शहरी क्षेत्रों में स्वीकृत नक्शों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट की शर्त लगा दी है। अब टेलीकॉम ऑपरेटरों के टावर लगाने के ऑनलाइन आवेदन भी 60 दिनों से ज्यादा लंबित नहीं रहेंगे।

विज्ञापन
Mobile phone towers will be installed only on buildings with approved maps, structural safety certificate
मोबाइल टॉवर(सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश में स्वीकृत नक्शों और स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट वाले भवनों पर ही मोबाइल फोन टावर लगेंगे। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने टावर लगाने वाली राइट ऑफ वे पॉलिसी 2021 संशोधित कर दी है। शहरी क्षेत्रों में स्वीकृत नक्शों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट की शर्त लगा दी है। अब टेलीकॉम ऑपरेटरों के टावर लगाने के ऑनलाइन आवेदन भी 60 दिनों से ज्यादा लंबित नहीं रहेंगे। प्रधान सचिव सूचना एवं प्रौद्योगिकी डॉ. रजनीश की ओर से सोमवार को राजपत्र में इस बाबत अधिसूचना जारी की गई है। संशोधित पॉलिसी के तहत शहरी नगर निकायों, टीसीपी क्षेत्रों और स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के तहत आने वाले क्षेत्रों के उन भवनों की छतों पर टावर लग सकेंगे, जिन्होंने भवन की सबसे ऊपरी मंजिल का नक्शा भी स्वीकृत करवाया गया होगा।

विज्ञापन


ग्रामीण क्षेत्रों में जहां नक्शों को पास करवाने के लिए बाद भवन नहीं बनाए जाते हैं, वहां भवनों की सुरक्षा के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा संशोधित पॉलिसी में टेलीकॉम ऑपरेटरों को अब 60 दिनों के बाद टावर लगाने की ऑटोमेटिक मंजूरी देने का प्रावधान कर दिया गया है। 60 दिन से पहले विभागीय अधिकारियों को आवेदन नामंजूर करने के कारण बताने होंगे। आवश्यक दस्तावेज जमा करवाने के लिए आपरेटर को कहना होगा। अब विभागीय अधिकारी 60 दिनों से पहले ऑपरेटर के आवेदनों को औपचारिकताएं पूरी नहीं होने पर मंजूर नहीं करेंगे तो 60 दिनों के बाद यह आवेदन अपने आप मंजूर हो जाएंगे। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियाें के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभाग में लंबित आवेदनों को जल्द निपटाने के लिए पालिसी में यह संशोधन किया गया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed