विधायकों को एक और तोहफा, न चर्चा न बहस, दो मिनट में पास लोन का विधेयक
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न कोई विरोध और न ही कोई चर्चा। जैसा पहले से ही होता आया है। शनिवार को हिमाचल विधानसभा में विधायकी जाने पर दोबारा सस्ते लोन का विधेयक मात्र दो मिनट में पारित कर दिया गया। पूर्व विधायकों को भवन निर्माण और गाड़ी की खरीद के लिए ये लोन दिया जाएगा।
मानसून सत्र के आखिरी दिन विधानसभा सदस्यों के भत्ते और पेंशन द्वितीय संशोधन विधेयक 2016 को मुख्यमंत्री ने सदन के पटल पर रखा। इसके बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। स्पीकर ने पूछा- जो इसके पक्ष में हैं हां कहें तो सत्ता पक्ष के सदस्यों ने ‘हां की हां’ मिलाई, जबकि विपक्ष मौन रहा। इसके ‘ना’ में कोई स्वर सुनाई नहीं दिया। करीब दो मिनट में ही ये विधेयक पारित कर दिया गया।
नए बिल में व्यवस्था की गई है कि प्रत्येक पूर्व सदस्य जिसने घर बनाने के लिए लिया लोन चुका दिया है वह दूसरा घर बनाने के लिए अग्रिम धनराशि ले सकता है। इसे घर बनाने, बनाए घर को खरीदने और पुराने घर के जीर्णोद्धार के लिए दिया जाएगा। इसी तरह से दूसरी कार खरीद के लिए भी ऐसे ही लोन (एडवांस) लेने की सुविधा दी जाएगी।
4 फीसदी ब्याज पर 50 लाख लोन
विधायक 50 लाख रुपये जबकि पूर्व विधायक 15 लाख रुपये तक का ऋण अग्रिम के रूप में ले सकते हैं। इसे विधानसभा सचिवालय 4 फीसदी ब्याज पर देता है।
मानसून सत्र के आखिरी दिन टीसीपी संशोधन विधेयक पास
विधायकों के सुझावों व आपत्तियों के बीच शनिवार को विधानसभा में टीसीपी संशोधन विधयेक पारित हो गया। विधेयक के लागू होने के बाद प्रदेश भर में करीब 55 हजार लोगों को फायदा मिलेगा। अब इस विधयेक को अंतिम मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। हिमाचल में अवैध भवनों को नियमित करने के लिए प्रदेश सरकार ने मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा पटल पर टीसीपी संशोधन विधेयक रखा था।
शनिवार को बिल पर चर्चा शुरू हुई तो विपक्ष व पक्ष के कई विधायकों ने अपने सुझाव दिए। विधायक महेंद्र सिंह ने कहा कि विधेयक में तय की गई फीस को 50 प्रतिशत कम किया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों पर इसका ज्यादा बोझ पड़ेगा।साथ ही उन्होंने कुल्लू मनाली में हाईकोर्ट के एक आदेश के चलते इस अध्यादेश के लागू होने पर भी सवाल उठाया। महेश्वर सिंह ने भी मार्केट वैल्यू के आधार पर जुर्माना तय करने की बात कही। साथ ही वह गांव जो बाद में टीसीपी एक्ट के तहत निगम एरिया में शामिल हुए, उन्हें पहले की ही तरह बिना नक्शा पास कराए निर्माण अप्रूव करने का प्रावधान किया जाए।
अगर शिमला और किसी दूसरे इलाके की मार्केट वैल्यू एक मानी जाएगी तो यह उन इलाकों के लोगों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने दो साल तक एक बिल लाकर उसे पेंडिंग रखने, उस पर चर्चा के लिए बनी कमेटी की सिफारिशों को नजरंदाज करने और अब फिर आर्डिनेंस लाने पर सवाल उठाए। कहा कि सरकार इस बात का जरूर ध्यान रखे कि कानून के तहत काम करने वालों का नुकसान न हो। राजीव बिंदल ने इन भवनों को अवैध कहने पर आपत्ति जताई। कहा कि जिस समय उन लोगों ने अपने भवनों का निर्माण किया, उस समय नक्शा पास कराने का प्रावधान नहीं था।
ऐसे में उन भवनों को अवैध कैसे कहा जा सकता है। वहीं, मर्ज एरिया के लोगों के लिए रेगुलराइजेशन फीस माफ करने और फ्लोर वाइज अमाउंट लगाने की मांग की। अनिरुद्ध सिंह ने ग्रीन एरिया में निर्माण करने की छूट देने के प्रावधान की मांग की। साथ ही पार्किंग एरिया को वाणिज्यिक व निजी भवनों के लिए अलग अलग रखने का सुझाव दिया। सुझावों के जवाब में शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि इसे सिर्फ लोगों के फायदे को ध्यान में रखकर लाया गया है। कहा कि इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि नियम के तहत निर्माण करने वालों को तर्कसंगत न लगे। साथ ही एनजीटी में मामला लंबित होने और वहां से कोई निर्देश आने के बाद ही कुल्लू मनाली में इसे लागू होने पर स्थिति साफ होगी।
क्या होगा फायदा
संशोधन विधेयक में अवैध भवनों को यथा स्थिति यानी जैसा है, वैसे ही नियमित किए जाने का प्रावधान किया गया है। टीसीपी संशोधन विधेयक में अगर किसी भवन मालिक ने दूसरे की जमीन या रास्ते पर कब्जा कर रखा है तो उसे नियमित नहीं किया जाएगा। अपनी मलकीयत में भवन नियमित होंगे। इसको लेकर अवैध भवन मालिकों से शपथ पत्र भी लिया जाएगा। सड़क के साथ बने भवनों के लिए पार्किंग होना अनिवार्य है। अगर भवन मालिक ने मंजिल के पार्किंग फ्लोर में कमरे बना दिए हैं तो ऐसे में उन भवन मालिकों को अपनी मलकीयत में पार्किंग बनाना अनिवार्य किया है। सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भवन नियमित नहीं होंगे।
यह होगी फीस
अब सरकार ने नगर निगम और नगर निकाय में 800 रुपये प्रति वर्ग मीटर जबकि टीसीपी एरिया में 400 रुपये प्रतिवर्ग मीटर के हिसाब से भवन नियमित करने की फीस तय की है। इसी तरह जिन लोगों ने बिना नक्शे के भवन बनाए हैं, उन भवनों को नियमित करने के लिए नगर निगम और नगर निकाय में 1200 रुपये जबकि टीसीपी में 600 रुपये प्रतिवर्ग मीटर के हिसाब से भवन नियमित कराने का फैसला लिया है। एक हजार रुपये से साथ लोगों को आवेदन करना होगा।
चर्चा के दौरान हुई सुरेश भारद्वाज और सीएम में कहासुनी
विधानसभा में शनिवार को हिमाचल प्रदेश नगरपालिका संशोधन विधेयक 2016 व नगर निगम संशोधन विधेयक पास हो गया। हालांकि विधेयक पर चर्चा के दौरान अपनी बात रखने उठे सुरेश भारद्वाज को सीएम वीरभद्र सिंह ने टोक दिया। इससे नाराज भारद्वाज ने सीएम से कहा कि वह काम तो जरूर करना चाहिए जिसके लिए चुनकर जनता ने भेजा है।
भारद्वाज के वक्तव्य पर सीएम ने नाराजगी जताते हुए गलत तरीके से बात करने का आरोप लगाया। इस पर सुरेश ने कहा कि अगर उन्होंने किसी से भी गलत तरीके से बात की हो और कोई कह दे तो वह अभी सदन छोड़ देंगे। हालांकि स्पीकर के दखल के बाद मामला शांत हो गया। शुक्रवार को सदन में पेश किए गए नगर पालिका संशोधन विधेयक पर शनिवार को चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक आशा कुमारी के सुझाव पर सरकार ने इस संशोधन बिल में एक्ट के सेक्शन 211 के तहत जारी होने वाले नोटिस पर सुनवाई और कार्रवाई के लिए प्रस्तावित 3 महीने की समयसीमा को कम कर 45 दिन करने का आश्वासन दिया है।
आशा कुमारी का कहना था कि नोटिस के बाद कार्रवाई का प्रावधान न होने की वजह से ही अतिक्रमण को बढ़ावा मिल रहा था। साथ ही अतिक्रमण की नोटिस पर फुल हाउस की मीटिंग न होने की वजह से भी कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। ऐसे में अब 45 दिन के अंदर कार्रवाई व सुनवाई होने पर अतिक्रमण पर अंकुश लगेगा और अवैध निर्माणों को नियमित करने के लिए आगे कोई रिटेंशन पालिसी या संशोधन नहीं करना पड़ेगा। हालांकि डॉ. राजीव बिंदल ने संशोधन में मनोनीत सदस्यों की संख्या बढ़ाने को असंवैधानिक बताया।
वहीं, नगर निगम संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सुरेश भारद्वाज ने निगम की संपत्तियों की नीलामी का अधिकार कमिश्नर को देने पर सवाल उठाया। कहा कि निगम के निर्वाचित सदस्यों की शक्तियों को कम कर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पंचायतीराज को मजबूत करने के सपने को ही तोड़ने का काम किया जा रहा है। साथ ही जुर्माने को कई गुना बढ़ाने पर भी सवाल उठाया। साथ ही मनोनीत सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर भी सरकार की आलोचना की। हालांकि सुझावों के जवाब में मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि मनोनीत सदस्यों को वोटिंग का अधिकार नहीं होगा। सरकार सिर्फ उन लोगों को प्रतिनिधित्व देना चाहती है जिनमें किसी विशेष क्षेत्र की महारत है।
मानसून सत्र खत्म, विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
पांच दिन तक चले विधानसभा का मानसून सत्र शनिवार को खत्म हो गया। इसके साथ ही विधानसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने इसकी घोषणा कर दी। इस दौरान उन्होंने सत्र के संचालन व सहयोग के लिए सरकार, विपक्ष, मीडिया व सचिवालय कर्मचारियों व अधिकारियों को धन्यवाद भी दिया।
बुटेल ने बताया कि पांच दिन के सत्र के दौरान नियम 62 के तहत 4 विषयों पर चर्चा हुई। इसके अलावा नियम 101 के तहत दो व आठ सरकारी विधेयक पारित हुए। वहीं, नियम 324 के तहत 13 विषय उठाए गए जिनके जवाब सरकार की ओर से दिए गए।
इसके अलावा विभिन्न समितियों द्वारा 25 प्रतिवेदन भी सभा पटल पर रखे गए। बुटेल ने बताया कि सत्र में पूछे गए सवालों के जवाब आनलाइन ही लिए गए। इससे पहले सीएम वीरभद्र सिंह व नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने भी सफल संचालन व सार्थक चर्चा के लिए सभी को धन्यवाद दिया।
एक ही जगह पर डटे अधिकारी, कर्मचारी होंगे ट्रांसफर
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि एक ही जगह पर डटे अधिकारियों व कर्मचारियों के नियमों के तहत तबादले किए जाएंगे। अधिकारी व कर्मचारी ने अपनी सर्विस बुक में जो होम स्टेशन दिया होगा, उसको आधार मानते हुए तबादले होंगे। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी भटियात के विधायक विक्रम सिंह जरयाल की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी।
विक्रम सिंह ने कहा कि भटियात विधानसभा क्षेत्र में ऐसे अधिकारी व कर्मचारी हैं, जो अपने होम ब्लॉक व साथ लगते ब्लॉक में तैनात हैं। नियमों के तहत अधिकारी व कर्मचारी अपने होम ब्लॉक में नहीं रह सकते हैं। कई अधिकारी व कर्मचारी ऐसे भी हैं, जिन्होंने सर्विस बुक में होम स्टेशन गांव का दिया है और शहर में घर बनाकर वहीं अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
घाटे के बावजूद निगम-बोर्डों ने खरीद लीं आलीशान गाड़ियां
घाटे में चल रहे निगम और बोर्डों ने अपने अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के लिए 11 लाख से अधिक आलीशान गाड़ियों की खरीद की है। बीते तीन साल के भीतर निगम-बोर्डों ने इन गाड़ियों पर 3,18,97,268 रुपये खर्च किए। हिमाचल राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने अपने अध्यक्ष के लिए दो गाड़ियां खरीदी हैं। एक गाड़ी अन्य निगम-बोर्डों की अपेक्षा सबसे महंगी है। इस गाड़ी की कीमत 22,30,334 रुपये है जबकि दूसरी 13,86,287 की है। खाद्य आपूर्ति मंत्री जीएस बाली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के चेयरमैन हैं। इन्होंने सरकारी लग्जरी गाड़ी को वापस किया है।
विधायक इंद्र सिंह ने विधानसभा में निगम-बोर्डों की ओर से नए वाहन क्रय संबंधित प्रश्न किया था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि 2 लाख किलोमीटर से ज्यादा गाड़ी चलने के बाद नई गाड़ियों की खरीद की जाती है। खाद्य आपूर्ति मंत्री ने सरकार की गाड़ी को वापस किया था। उन्होंने निगम से गाड़ी ली है।