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Himachal: विक्रमादित्य के बाद अधिकारी पर भड़के मंत्री गोमा, डीसी मंडी के खिलाफ दिया विशेषाधिकार हनन का नोटिस
Fri, 30 Jan 2026 02:30 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:30 PM IST
सार
मंत्री यादविंद्र गोमा ने उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन का नोटिस साैंपा है।
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मंत्री यादविंद्र गोमा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बाद अब एक और कैबिनेट मंत्री ने भी अफसरशाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग के मंत्री यादविंद्र गोमा ने मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। उन्होंने उपायुक्त पर गणतंत्र दिवस समारोह से एक दिन पहले मंडी आगमन के दौरान अनुपस्थित रहने और स्थापित सरकारी प्रोटोकॉल की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है।
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शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को भेजे नोटिस में मंत्री गोमा ने कहा है कि वे 25 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के लिए मंडी पहुंचे थे। यह दौरा राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम से जुड़ा था, इसके बावजूद उपायुक्त न तो स्वयं उपलब्ध थे और न ही उनकी ओर से किसी प्रकार का औपचारिक संचार किया गया। कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई। मंत्री का कहना है कि एक कैबिनेट मंत्री के आगमन के बावजूद उपायुक्त की अनुपस्थिति प्रशासनिक उदासीनता और जिम्मेदारी के अभाव को दर्शाती है। यह मामला सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं है। उनका यह व्यवहार सरकारी प्रोटोकॉल और प्रशासनिक मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन है। इससे न केवल एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के सांविधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची है, बल्कि यह विधायिका के प्रति असम्मान को भी दर्शाता है।
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उनके अनुसार, उपायुक्त की यह भूमिका विधानसभा के विशेषाधिकार का उल्लंघन है। मंत्री ने यह नोटिस हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कार्यप्रणाली और कामकाज के नियमों के अध्याय-12 के नियम 75 के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। गोमा ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि इस नोटिस को औपचारिक रूप से विशेषाधिकार हनन के नोटिस के रूप में स्वीकार किया जाए। उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन से पूरे प्रकरण पर स्पष्टीकरण तलब किया जाए। इस नोटिस के बाद अफसरशाही में खलबली है। पूरे घटनाक्रम पर सरकार की नजर भी बनी हुई है। अब देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस नोटिस पर क्या रुख अपनाते हैं और उपायुक्त मंडी से किस स्तर पर जवाब मांगा जाता है।