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स्कूलों में नहीं पकेगा खाना, हड़ताल पर जाएंगे मिड डे मील वर्कर्स
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 31 Dec 2016 12:02 AM IST
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 20 जनवरी को मिड डे मील नहीं पकेगा। केंद्र और राज्य सरकार पर कर्मियों के शोषण करने का आरोप लगाते हुए मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने एक दिन की हड़ताल करने का फैसला लिया है। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन (संबंधित सीटू) की राज्य कमेटी ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में बढ़ोतरी की बात करती हैं, लेकिन उसे लागू नहीं करतीं। राज्य सरकारों ने 12 साल से मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की है।
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मिड डे मील वर्कर्स को मात्र एक हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाता है और वह भी साल में मात्र 10 महीने दिया जाता है। यूनियन की राज्य अध्यक्ष कांता महंत ने कहा कि लगातार महंगाई बढ़ रही है, लेकिन वर्कर्स के वेतन में बढ़ोतरी नहीं की गई है। यूनियन ने सरकार से जानना चाहा है कि जब विधायक और मंत्री प्रतिमाह 2 लाख 40 हजार में गुजारा नहीं कर सकते तो मिड डे मील वर्कर्स 1000 रुपये प्रतिमाह में कैसे गुजारा करें।
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महिलाओं को सशक्त बनाने के वायदे करने वाली सरकार गरीब और विधवा महिलाओं को 1000 रुपये वेतन देकर उनकी गरीबी का मजाक बना रही है। यूनियन ने फैसला लिया है कि 20 जनवरी से पहले मुख्यमंत्री को इस बजट सत्र में मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में बढ़ोतरी का प्रावधान करवाने के लिए ज्ञापन दिया जाएगा। यूनियन ने मांग की है कि वर्कर्स को सरकार की ओर से घोषित न्यूनतम वेतन 6000 रुपये प्रतिमाह दिया जाए और चौथे दर्जे का सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए।
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इसके तहत वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी मानना, ग्रेच्युटी और पेंशन की सुविधा शामिल है। वर्कर्स को नौकरी से न हटाया जाए, प्रत्येक स्कूल में दो वर्कर्स को नियुक्त किए जाएं। अतिरिक्त कार्य करवाने के लिए अतिरिक्त वेतन दिया जाए। नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र दिए जाए। महिला वर्कर्स के लिए 6 महीने का प्रसूति अवकाश दिया जाए। प्रतिमाह वेतन का भुगतान किया जाए। यूनियन ने वर्कर्स विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदेश में 50,000 पर्चे छापने का फैसला भी लिया है। पर्चे को पूरे प्रदेश के मिड डे मील वर्कर्स में बांटा जाएगा।