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वेतन बढ़ोतरी की मांग पर गरजे मिड-डे मील और आंगनबाड़ी वर्कर्स
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 21 Jan 2017 12:01 AM IST
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वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर शुक्रवार को प्रदेश भर में मिड डे मील वर्कर्स और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। सीटू के अखिल भारतीय आह्वान पर राजधानी शिमला सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों और ब्लाकों में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला गया।
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सीटू ने एमडीएम वर्कर्स को 6000 रुपये और आंगनबाड़ी वर्कर्र्स को 7500 रुपये वेतन देने की मांग की। सीटू के राज्य महासचिव विजेंद्र मेहरा ने कहा कि साल 2013 में राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में प्रधानमंत्री की घोषणानुसार देश में मौजूद लाखों स्कीम वर्कर्स को नियमित वर्कर्स का दर्जा दिया जाए।
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उन्हें सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहे। मिड डे मील वर्कर्स ने भी हड़ताल की। विजेंद्र मेहरा ने मांग करते हुए कहा आंगनबाड़ी वर्कर्स को हरियाणा की तर्ज पर 7500 रुपये और 4000 रुपये वेतन दिया जाए।
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सेवानिवृत्ति की आयु 65 साल की जाए। दो साल से लंबित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का पैसा दिया जाए। उन्हें पेंशन, प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी की सुविधा दी जाए। उन्होंने कहा कि मिड डे मील वर्कर्र्स को न्यूनतम वेतन 6000 देने की मांग की। इसके अलावा प्रसूति अवकाश, दस महीने की जगह पूरे साल वेतन, मेडिकल और पेंशन सुविधा देने की मांग भी की।
आंगनबाड़ी यूनियन की अध्यक्ष खीमी भंडारी ने कहा केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी के बजट को आधा कर दिया है। दो वर्ष पूर्व बजट में की गई बढ़ोतरी को आज तक लागू नहीं किया गया। मिड डे मील यूनियन की जिला शिमला अध्यक्ष हिमी देवी ने कहा एमडीएम वर्कर्स को मात्र एक हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है।
वेतन एक साल में दस महीने ही दिया जाता है। मेडिकल और छुट्टियों की सुविधा नहीं दी जाती। एमडीएम के बजट को केंद्र सरकार ने 13 हजार करोड़ से घटाकर नौ हजार करोड़ कर दिया है। प्रदेश सरकार की ओर से भी वर्कर्स को वेतन में बढ़ोतरी नहीं दी जा रही।