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असम से लापता मानसिक रोगी फिर परिवार से मिली
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बालूगंज में दो माह से चल रहा था उपचार, अस्पताल के कर्मचारियों ने निभाई अहम भूमिका
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। असम की रहने वाली मानसिक रूप से पीड़ित महिला मरीज आखिरकार अपने परिवार के पास पहुंच गई। मानसिक स्वास्थ्य हिमाचल अस्पताल एवं पुनर्वास शिमला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय पाठक ने बताया कि मरीज की देखभाल और सुरक्षा को लेकर अस्पताल के प्रत्येक स्टाफ को गमूचा (व्यक्ति को सम्मानित करने का पारंपरिक असमिया तरीका) भेंट किया है।
असम की रहने वाली महिला मानसिक रोग से पीड़ित थी। फरवरी माह में पति की मौत के बाद तबीयत और खराब हो गई थी। अप्रैल से वह घर से गायब थी। परिवार के सदस्यों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। यह महिला ट्रेन, बसों में यात्रा करके हिमाचल के पांवटा साहिब में उतर गई थी। यहां से न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उन्हें मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास केंद्र शिमला भेजा था। यहां पर महिला रोगी का उपचार किया गया। संपर्क करके मदद ली और रोगी के परिवार के सदस्यों की पहचान करके उन्हें शिमला बुलाया। इसके बाद महिला मरीज को परिवार के सदस्य के साथ भेज दिया गया। परिवार के सदस्यों ने अस्पताल के कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। असम की रहने वाली मानसिक रूप से पीड़ित महिला मरीज आखिरकार अपने परिवार के पास पहुंच गई। मानसिक स्वास्थ्य हिमाचल अस्पताल एवं पुनर्वास शिमला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय पाठक ने बताया कि मरीज की देखभाल और सुरक्षा को लेकर अस्पताल के प्रत्येक स्टाफ को गमूचा (व्यक्ति को सम्मानित करने का पारंपरिक असमिया तरीका) भेंट किया है।
असम की रहने वाली महिला मानसिक रोग से पीड़ित थी। फरवरी माह में पति की मौत के बाद तबीयत और खराब हो गई थी। अप्रैल से वह घर से गायब थी। परिवार के सदस्यों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। यह महिला ट्रेन, बसों में यात्रा करके हिमाचल के पांवटा साहिब में उतर गई थी। यहां से न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उन्हें मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास केंद्र शिमला भेजा था। यहां पर महिला रोगी का उपचार किया गया। संपर्क करके मदद ली और रोगी के परिवार के सदस्यों की पहचान करके उन्हें शिमला बुलाया। इसके बाद महिला मरीज को परिवार के सदस्य के साथ भेज दिया गया। परिवार के सदस्यों ने अस्पताल के कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।
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