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Shimla News: मासिक धर्म आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया, उपेक्षापूर्ण व्यवहार गलत
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जुन्गा में आयोजित शिविर में डॉ. मनोज ने लोगों को किया जागरूक, बोले-धार्मिक शास्त्रों में नारी को दी है देवी की संज्ञा
500 एमएल तक होता है शरीर से रक्तस्राव
गांवों में अभी भी चार दिन तक महिलाओं का खाना बनाने रखते हैं वर्जित
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। महिलाओं में मासिक धर्म आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म को लेकर महिलाओं के साथ साथ जो व्यवहार होता है वह तर्कसंगत नहीं है।
यह बात सिविल अस्पताल जुन्गा के प्रभारी डॉ. मनोज कुमार ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा जुन्गा में आयोजित जागरूकता शिविर में कही। उन्होंने कहा कि अतीत में महिलाओं को मासिक धर्म आने पर घर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता था। इन्हें गोशालाओं में रहने को मजबूर होना पड़ता था। अभी भी कई इलाकों में इस तरह की भ्रांतियां हैं। इसे लेकर लोगों को जागरूक करना जरूरी है। डॉ. मनोज ने बताया कि हमारे धार्मिक शास्त्रों में नारी को देवी की संज्ञा दी है। धार्मिक वेदों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान तीन दिन तक महिला को आराम करने की सलाह दी है, क्योंकि मासिक धर्म आने पर महिलाओं में काफी रक्तस्राव हो जाता है। मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के शरीर से तीन दिन में करीब 500 एमएल तक रक्तस्राव होता है जिससे काफी कमजोरी आ जाती है। इसलिए वेदों में मासिक धर्म आने पर आराम करने की सलाह दी गई है। वर्तमान में विशेषकर ग्रामीण परिवेश में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को घर पर खाना बनाने और किसी वस्तु को छूने की अनुमति नहीं होती है। यह नियम करीब 4 दिन तक लागू रहते हैं। इस दौरान महिलाओं को अलग कमरे में सोना पड़ता है।
स्वच्छता रखना जरूरी : डॉ. मनोज
डॉ. मनोज कुमार ने लोगों से आग्रह किया कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ अस्पृश्यता जैसा व्यवहार नहीं करें। मासिक धर्म आने से महिला अशुद्ध नहीं होती है, यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। 10 वर्ष की उम्र के बाद किसी भी किशोरी को मासिक धर्म आ सकता है। इस दौरान स्वच्छता बनाए रखना बहुत जरूरी है। बेटियों को इस बारे जानकारी देने के लिए शिक्षण संस्थानों में विभाग द्वारा विशेष शिविर लगाए जाते हैं। बताया कि महिलाओं के शरीर में हार्मोन में होने वाले बदलाव की वजह से गर्भाश्य से रक्तस्राव होता है।
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500 एमएल तक होता है शरीर से रक्तस्राव
गांवों में अभी भी चार दिन तक महिलाओं का खाना बनाने रखते हैं वर्जित
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। महिलाओं में मासिक धर्म आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म को लेकर महिलाओं के साथ साथ जो व्यवहार होता है वह तर्कसंगत नहीं है।
यह बात सिविल अस्पताल जुन्गा के प्रभारी डॉ. मनोज कुमार ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा जुन्गा में आयोजित जागरूकता शिविर में कही। उन्होंने कहा कि अतीत में महिलाओं को मासिक धर्म आने पर घर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता था। इन्हें गोशालाओं में रहने को मजबूर होना पड़ता था। अभी भी कई इलाकों में इस तरह की भ्रांतियां हैं। इसे लेकर लोगों को जागरूक करना जरूरी है। डॉ. मनोज ने बताया कि हमारे धार्मिक शास्त्रों में नारी को देवी की संज्ञा दी है। धार्मिक वेदों के अनुसार मासिक धर्म के दौरान तीन दिन तक महिला को आराम करने की सलाह दी है, क्योंकि मासिक धर्म आने पर महिलाओं में काफी रक्तस्राव हो जाता है। मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के शरीर से तीन दिन में करीब 500 एमएल तक रक्तस्राव होता है जिससे काफी कमजोरी आ जाती है। इसलिए वेदों में मासिक धर्म आने पर आराम करने की सलाह दी गई है। वर्तमान में विशेषकर ग्रामीण परिवेश में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को घर पर खाना बनाने और किसी वस्तु को छूने की अनुमति नहीं होती है। यह नियम करीब 4 दिन तक लागू रहते हैं। इस दौरान महिलाओं को अलग कमरे में सोना पड़ता है।
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स्वच्छता रखना जरूरी : डॉ. मनोज
डॉ. मनोज कुमार ने लोगों से आग्रह किया कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ अस्पृश्यता जैसा व्यवहार नहीं करें। मासिक धर्म आने से महिला अशुद्ध नहीं होती है, यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। 10 वर्ष की उम्र के बाद किसी भी किशोरी को मासिक धर्म आ सकता है। इस दौरान स्वच्छता बनाए रखना बहुत जरूरी है। बेटियों को इस बारे जानकारी देने के लिए शिक्षण संस्थानों में विभाग द्वारा विशेष शिविर लगाए जाते हैं। बताया कि महिलाओं के शरीर में हार्मोन में होने वाले बदलाव की वजह से गर्भाश्य से रक्तस्राव होता है।
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