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Shimla News: शिमला में रवींद्रनाथ टैगोर की यादें, सनत आर्ट गैलरी में शोभा बढ़ा रहे टेबल, कुर्सियां और पेटिंग

Tue, 10 Jan 2023 11:09 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 10 Jan 2023 11:09 PM IST
सार

 गैलरी में रवींद्रनाथ टैगोर की टेबल, कुर्सियों और पेटिंग को रखा गया है। इसे प्रसिद्ध चित्रकार असित कुमार हाल्दार ने हिमाचल के चित्रकार एवं मूर्तिकार सनत चटर्जी को गिफ्ट के तौर पर दिया था। अब इस म्यूजियम को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है।

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Memories of Rabindranath Tagore in Shimla, tables, chairs and paintings adorn the Sanat Art Gallery
शिमला में रवींद्रनाथ टैगोर की यादें। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की पर्यटन नगरी शिमला के समरहिल में आज भी राष्ट्रगान रचयिता रवींद्रनाथ टैगोर की यादें महफूज रखी गई हैं। सनत आर्ट फाउंडेशन गैलरी में टैगोर की ओर से इस्तेमाल वस्तुएं लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। गैलरी में रवींद्रनाथ टैगोर की टेबल, कुर्सियों और पेटिंग को रखा गया है। इसे प्रसिद्ध चित्रकार असित कुमार हाल्दार ने हिमाचल के चित्रकार एवं मूर्तिकार सनत चटर्जी को गिफ्ट के तौर पर दिया था। अब इस म्यूजियम को आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। असित कुमार का रवींद्रनाथ टैगोर के साथ विशेष रिश्ता रहा। टैगोर ने अपनी कुर्सी, टेबल, पेटिंग और प्रतिलिपियां उन्हें दी थीं। असित ने इनमें से कुछ चीजें अपने शिष्य हिमाचल के चित्रकार एवं मूर्तिकार सनत चटर्जी को प्रदान की थीं।

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मूलत: कोलकाता के रहने वाले मूर्तिकार स्वर्गीय संत चटर्जी शिमला आए थे। वह वर्ष 1960 में नाहन कॉलेज में कार्यरत थे। इसके बाद 1967 में कोटशेरा के आर्ट कॉलेज में चित्रकला के शिक्षक नियुक्त हुए। इन्होंने एक रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था। जिसमें 90 फीट के कपड़े की पेटिंग बनाई थी। इसके बाद चटर्जी के बेटे प्रो. हिम चटर्जी ने 2008 में समरहिल स्थित अपने घर में सनत आर्ट फाउंडेशन गैलरी शुरू की। अब इस गैलरी में रविंद्रनाथ टैगौर के सामान के अलावा प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस की पेंटिंग भी रखी गई है। आम लोगों को 50 रुपये और विदेशों से आए लोगों के लिए 100 रुपये फीस रखी गई है। संत आर्ट फाउंडेशन  के मैनेजर पवन शर्मा का कहना है कि इस म्यूजियम में रवींद्रनाथ टैगोर की यादें संभालकर रखी गई है। टैगौर इन टेबल और कुर्सियों को इस्तेमाल बैठने के लिए करते थे। 
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गीतकार गुलजार ने किया था गैलरी का शुभारंभ
साल 2009 में मशहूर शायर और गीतकार गुलजार ने इस आर्ट गैलरी का शुभारंभ किया था। गैलरी में गुरु रवींद्र नाथ टैगोर का बनाया एक चित्र, डायरी, चमड़े का बैग, पेंटिंग ब्रश, कुर्सी ,टेबल, लकड़ी की बनाई कलाकृति, स्केच बुक जैसा समान रखा है।  गैलरी में सनत चैटर्जी, प्रो. हिम चैटर्जी सहित देश के नामी चित्रकारों की करीब 500 कलाकृतियां रखी गई हैं। 
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असित कुमार टैगोर के सगे भांजे थे
असित कुमार हल्दार गुरु रवींद्रनाथ टैगोर के सगे भांजे थे। सनत चैटर्जी उनके दत्तक पुत्र और शिष्य थे, जिन्होंने 14 साल तक उनसे चित्रकला की बारीकियां सीखीं। असित कुमार ने ही सनत चैटर्जी को 1960 में राष्ट्रवाद के अंग के रूप में भारतीय कला के प्रचार-प्रसार के लिए मेरे पिता को शिमला भेजा गया। 

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