मंत्री, विधायकों के वेतन का मुद्दा गरमाया, राष्ट्रपति तक जाएगा मामला
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विधायकों, मंत्रियों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी का मामला खूब तूल पकड़ गया है। पब्लिक राज्यपाल के जरिये इस बारे में राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजने का मन बना चुकी है। हिमाचल बचाओ मंच तो इस बारे में हस्ताक्षर अभियान भी शुरू करने की तैयारी है। कुल्लू निवासी मनोज शर्मा ने कहा है कि वे जल्दी ही इस बारे में राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजेंगे।
उनका कहना है कि जनता के पैसे का इस तरह से इस्तेमाल उचित नहीं है। धर्मशाला में रहने वाले हिमाचल बचाओ मंच के संस्थापक एसएस गुलेरिया ने कहा कि एक ओर जहां सरकार को कर्ज लेकर चलाया जा रहा है। सरकार के पास ब्याज चुकाने के लिए पैसे नहीं है। किस नैतिक आधार पर पैसे बढ़ाए गए हैं।
हिमाचल का युवा आज पूरी तरह से आक्रोश में है। युवा बेरोजगारों के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। ये कहां जाएंगे। उन्होंने कहा कि यहां पर उद्योगों को लगाएं और सिस्टम को चैनेलाइज करें। ज्यादा से ज्यादा जॉब्स सृजित करें। नेता प्रदेश में कुछ नहीं कर रहे हैं। प्रदेश पर जो हजारों करोड़ रुपये का कर्ज डाल दिया है, उसे चुकाने का कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा है।
दूसरे मुद्दे पर खूब लड़ाइयां हो रही हैं। एसएस गुलेरिया ने कहा कि वे विधायकों-मंत्रियों के वेतन-भत्तों में इस अनावश्यक बढ़ोतरी के मामले में राज्यपाल और राष्ट्रपति को ज्ञापन देंगे। जरूरी हुआ तो इस मामले में एक हस्ताक्षर अभियान भी छेड़ा जाएगा।
बाल कल्याण परिषद से सेवानिवृत्त कार्यकारी अधिकारी उमा शर्मा ने कहा कि विधायकों को हम चुनते हैं। इनको रनिंग स्केल देने के लिए इनके पास पैसा नहीं होता। हमारी लाइफ की कोई वैल्यू नहीं है। परिषद के लगभग 200 कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिला है और जहां अपने वेतन-भत्ते बढ़ाने की बारी है, वहां नेतागण देरी नहीं करते।
पैसे आते किसे बुरे लगते हैं: धूमल
बजट सत्र में मंत्रियों और विधायकों के बढ़ाए गए मानदेय पर उपजे विवाद पर नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने चुटकी लेते हुए कहा कि आखिर पैसे आते हुए किसे बुरे लगते हैं। इंदौरा हलके के मंड क्षेत्र में बसतंपुर स्कूल के वार्षिक समारोह में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे धूमल ने अनौपचारिक बातचीत के दौरान बताया कि पैसा आज की जरूरत है।
विधायकों और मंत्रियों के भी अपने काफी खर्चे होते हैं। ऐसे में समय के हिसाब से उनके मानदेय में बढ़ोतरी होनी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि आखिर पैसे आते हुए किसे बुरे लगते हैं। धूमल ने कहा कि मंड क्षेत्र के गन्ना किसानों को पंजाब में फसल बेचने में पेश आ रही मुश्किल को लेकर वह पंजाब के मुख्यमंत्री से मिलकर इसका हल निकालने का आग्रह करेंगे।
मंड के किसानों को पंजाब में गन्ना न बिकने के चलते लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। धूमल ने मंड क्षेत्र में लग रहे स्टोन क्रशरों के बारे में प्रदेश सरकार के खिलाफ रोष जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार के क्रेशर लगाने के मंजूरी देने के मसले को विधानसभा में उठाया जाएगा। क्रेशर लगाने की मंजूरी को रद्द कर मंड क्षेत्र के लोगों के साथ न्याय किया जाना चाहिए।