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Himachal: बड़ी आंत तक आसानी से पहुंचेगी दवाई, क्वेरसेटिन से होगा कैंसर का इलाज, आईएचबीटी ने ईजाद की नई तकनीक

Sun, 07 Sep 2025 11:42 AM IST
Krishan Singh कमलेश रतन भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर।
कमलेश रतन भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर। Published by: Krishan Singh Updated Sun, 07 Sep 2025 11:42 AM IST
सार

गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कारगर तकनीक इजाद की गई है। इससे कोलन को हील करने के लिए प्रयोग हो रही सिथेंटिक ड्रग के दुप्प्रभावों से राहत मिलेगी।

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Medicine will reach the large intestine easily, cancer will be treated with quercetin, IHBT Palampur invented
सीएसआईआर आईएचबीटी पालमपुर के शोधार्थी नबाव खान - फोटो : संवाद

विस्तार

अब कोलन (बड़ी आंत) की कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कारगर तकनीक इजाद की गई है। इससे कोलन को हील करने के लिए प्रयोग हो रही सिथेंटिक ड्रग के दुप्प्रभावों से राहत मिलेगी।

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मौजूदा समय में कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए कीमोथैरेपी में सिथेंटिक ड्रग का प्रयोग मरीजों के अन्य अंगों पर प्रभाव, बाल झड़ने की समस्या और रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर रहा है। ऐसे में सिथेंटिक ड्रग के प्रयोग की बजाय पौधों से मिलने वाले तत्व क्वेरसेटिन बनी दवाओं के प्रभावी प्रयोग की दिशा में कार्य किया जा रहा है। क्वेरसेटिन को बड़ी आंत तक पहुंचाना मुश्किल है, लेकिन इसका समाधान निकाला गया है।

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सीएसआईआर आईएचबीटी पालमपुर के शोधार्थी नबाव खान ने क्वेरसेटिन को बिना प्रभावित हुए कोलन तक पहुंचाने की तकनीक सुझाई है। उन्होंने एनआईटी हमीरपुर में चल रहे अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन में इस शोध पत्र को पेश किया है। इस सम्मेलन में अमेरिकन केमिकल सोसायटी (एसीएस) की ओर इस शोध पत्र को सर्वश्रेष्ठ चुना गया है। मई माह में यह शोध पत्र जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर में छप चुका है। इस शोध में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट क्वेरसेटिन को कोलन तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए साइक्लोडेक्सट्रिन-आधारित नैनोफाइबर का इस्तेमाल किया गया है।

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नबाव ने पहले क्वेरसेटिन को साइक्लोडेक्सट्रिन नामक अणु के साथ एक स्थिर कॉम्प्लेक्स में तैयार किया। तैयार कॉम्प्लेक्स को इलेक्ट्रो स्पीनिंग डिवाइस के जरिये नैनो फाइबर बनाया, जो कि क्वेरसेटिन को पेट के अम्लीय परिस्थितियों से बचाएगा और सीधा बड़ी आंत तक पहुंचाने में कारगर होगा।

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81.9 फीसदी क्वेरसेटिन कोलन तक पहुंची
नबाव के इस शोध को दक्षिण अफ्रीका से सम्मेलन में पहुंचे विशेषज्ञों ने भी सराहा है। क्वेरसेटिन में सूजनरोधी और कैंसररोधी जैसे औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो कि पेट का पीएच लेवल 1.2 के चलते अम्लीय परिस्थितियों में जल्दी नष्ट हो जाता है। इससे इसे 7.0 पीएच लेवल वाले कोलन तक पहुंचाना मुश्किल होता है। नबाव की ओर से सुझाई तकनीक के परीक्षणों में पाया गया कि पेट और छोटी आंत में क्वेरसेटिन की केवल 5 फीसदी तक ही रिलीज़ हुई, जबकि कोलन में पहुंचने पर यह मात्रा लगभग 81.9 फीसदी से तक पहुंची है।

इलाज में दवाओं के दुष्प्रभाव होंगे कम : नबाव
सीएसआईआर आईएचबीटी पालमपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक अंकित सनेजा के मार्गदर्शन में भोपाल निवासी नबाव खान ने यह शोध किया है। उनका कहना है कि क्वेरसेटिन एक शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है, जो अनेक औषधीय गुणों से भरपूर है। यह पौधों से मिलने वाला तत्व है, जो शरीर को बीमारियों से बचाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट और कैंसररोधी असर रखता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह पेट के अम्लीय वातावरण में जल्दी नष्ट हो जाता है और कोलन तक सही मात्रा में नहीं पहुंच पाता। बड़ी आंत में बिना नष्ट हुए पहुंचने से कोलन कैंसर सहित, अल्सरेटिव कोलाटिस और आंत की सूजन की गंभीर बीमारी के इलाज में सहायता मिलेगी। इस तकनीक में प्रयोग पॉलिमर यूनाइटिड स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मान्यता प्राप्त है।

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