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विकास तो दूर, सैलरी देने तक के पैसे नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 02 Nov 2014 08:57 AM IST
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नगर निगम शिमला के पास अपने अफसरों और कर्मचारियों को तनख्वाह देने लायक भी पैसा नहीं बचा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहा नगर निगम अब विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार से मिली अनुदान राशि को तनख्वाह पर खर्च कर रहा है।
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अक्तूबर माह में मैच्योर हुई 4.5 करोड़ रुपये की तीन एफडी ने इस माह तो नगर निगम को सहारा दे दिया है लेकिन अगर हालात ऐसे ही रहे तो नगर निगम कंगाली की कगार पर पहुंच जाएगा। अक्तूबर महीने में नगर निगम पर 7.39 करोड़ रुपये की देनदारी है।
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निगम के चालू खाते में अभी 2.52 करोड़ रुपये है। ऐसे में चालू खाते और एफडी की राशि कुल मिलाकर 6.58 करोड़ रुपये बनती है। इसके बावजूद नगर निगम के पास पूरी देनदारी चुकाने का जुगाड़ नहीं है।
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एफडी से बांटी जाएगी तनख्वाह
पहली नवंबर को नगर निगम के स्टाफ को मैच्योर एफडी से तनख्वाह बांटी जाएगी। यह तय कर लिया गया है। 17 और 27 अक्तूबर को नगर निगम की यह तीन एफडी मैच्योर हुई हैं। बीते रोज ही निगम के आयुक्त और सहायक आयुक्त का तबादला हुआ है। ऐसे में लेखा शाखा की परेशानियां अब बढ़ गई हैं।
पानी के बिल का पैसा भी नहीं आ रहा
अक्तूबर माह में नगर निगम ने पानी के बिल जारी नहीं किए हैं। हाईकोर्ट ने पानी के रेट को बढ़ाने की अधिसूचना को रद कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद से निगम ने बिल जारी करना और बिल जमा करना बंद कर दिया है। अफसरों की लेटलतीफी के चलते अभी तक इस मामले में कोई फैसला नहीं हो सका है। निगम की आय घटने का यह एक बड़ा कारण है।
प्रॉपर्टी टैक्स मामले में भी लेटलतीफी
राजधानी में प्रापर्टी टैक्स की वसूली भी इस वित्तीय वर्ष में नहीं हुई है। नगर निगम फैसला नहीं ले पा रहा है कि कब से प्रापर्टी टैक्स वसूलना है। अगर निगम को टैक्स से आय होना शुरू होती है तो आर्थिक तंगी काफी हद तक दूर हो जाएगी। लेकिन अभी तक इस बारे फैसला नहीं हुआ है।
आय बढ़ाने को बनेगी पॉलिसी
बीते दिनों महापौर संजय चौहान की अध्यक्षता में हुई फाइनेंस एंड प्लानिंग कमेटी की बैठक में मैच्योर एफडी से देनदारियां देने का प्रस्ताव पारित किया है। बैठक में आय के साधन बढ़ाने के लिए पालिसी बनाने का फैसला भी लिया गया।