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बंदरों से हारा निगम, मांगी मारने की अनुमति
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 13 Nov 2014 09:40 AM IST
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शिमला शहर में बढ़ रहे बंदरों के आतंक के आगे नगर निगम ने हाथ खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने में असफल रहने पर अब बंदरों को वैज्ञानिक तरीके से मारने की इजाजत मांगने का फैसला हुआ है।
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बुधवार को उपमहापौर टिकेंद्र पंवर की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में निगम सदन से प्रस्ताव पारित कर राज्य और केंद्र सरकार को भेजने का फैसला लिया गया। उपमहापौर टिकेंद्र पंवर ने बताया कि वन विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, स्थानीय सामाजिक संस्थाओं और निगम पार्षदों की मौजूदगी में बंदरों के बढ़ते आतंक पर गहनता से चिंतन किया गया।
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बीते दिनों मिडिल बाजार में बंदर के डर से छत से गिरी महिला की मौत होने पर दुख भी जताया गया। लंबी चर्चा के बाद फैसला लिया गया कि नगर निगम सदन से प्रस्ताव पारित कर राज्य और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। बंदरों के कारण लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ने का तर्क देते हुए बंदरों को वैज्ञानिक तरीके से मारने की अनुमति मांगी जाएगी।
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इसके लिए स्पेशल टीम बनाने की मांग करेंगे। बंदरों के निर्यात पर लगी रोक को भी हटाने का आग्रह करेंगे। टिकेंद्र पंवर ने बताया कि सरकार से मांग की जाएगी कि कानून में संशोधन करते हुए लोगों को राहत दिलाई जाए। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में बंदरों से जुड़े मामलों में जो स्टे हुए हैं उन पर भी जल्द कार्रवाई हो। टिकेंद्र पंवर ने कहा कहा प्रति माह सौ से अधिक लोग आईजीएमसी और रिपन अस्पताल में बंदर के काटने से घायल होकर पहुंचते हैं।
बैठक में यह हुए फैसले
बंदरों को वैज्ञानिक तरीके से मारने की अनुमति मिले
बंदरों के निर्यात पर लगी रोक को जल्द हटाया जाए
न्यायालयों में बंदरों से जुड़े मामलों के स्टे खत्म हों
अभी सिर्फ नसबंदी की है व्यवस्था
बंदरों की बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए अभी सिर्फ बंदरों की नसबंदी करने की योजना है। वन्य प्राणी विभाग बंदरों की नसबंदी करता है। बंदरों पर रोकथाम लगाने के लिए बनाई गई सभी योजनाएं नाकाम साबित हुए है। नसबंदी योजना भी सवालों के घेरे में है।
खुले में न फेंके खाद्य वस्तुएं
बैठक के माध्यम से नगर निगम ने शहर की जनता से खुले में खाने की वस्तुएं न फेंकने की अपील की है। महापौर संजय चौहान ने कहा है कि खुले में खाना फेंकने के चलते ही बंदर आबादी वाले क्षेत्रों में आते हैं। अगर लोग खुले में खाना फेंकना बंद करेंगे तो बंदर जंगलों तक ही सीमित रहेंगे। उन्होंने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए शहर में जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा।