'आतंकवादियों से निपट लूं, फिर बात करता हूं'
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शहादत से कुछ घंटे पहले ही पत्नी निशा की शहीद पति राजेश कुमार पठानिया से चंद मिनटों के लिए फोन पर बात हुई थी। सर्च ऑपरेशन में तैनात राजेश के लिए पत्नी से फोन पर बात करने से ज्यादा देश की रक्षा के लिए आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना था। राजेश ने पत्नी निशा को बार-बार फोन करने के लिए मना किया था।
राजेश ने सर्च ऑपरेशन से फ्री होकर बात करने का आश्वासन दिया था। निशा फोन का इंतजार करती रही। सेना से फोन आया तो पूरा परिवार सदमे में चला गया। हंदवाड़ा में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए राजेश कुमार की 28 अक्तूबर को सुबह दस बजे पत्नी निशा से फोन पर बात हुई थी।
फिर खत्म नहीं हुआ इंतजार
पत्नी निशा भी राजेश के सर्च ऑपरेशन से फ्री होने के बाद फोन का इंतजार करती रही, लेकिन अगले दिन सेना से आए फोन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सीमा पर तैनात राजेश की चिंता पत्नी निशा को सता रही थी। इस कारण वह बार-बार फोन कर पति का हाल चाल पूछती थी।
वहीं राजेश ने पत्नी को बार-बार फोन करने से इनकार किया था। वीरवार को राजेश कुमार के पार्थिव शरीर को देखकर परिवार के सदस्यों की चीख पुकार से पूरे गांव में मातम छा गया। वहीं पिता रूप सिंह पठानिया ने शहीद राजेश की आत्मा की शांति के प्रार्थना की और ऐसे बेटे सभी को देने की फरियाद मांगी।