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Martyr Arvind Kumar: अरविंद ने खेलों में भी चमकाया था नाम, पिता को नहीं पता, बेटा देश के लिए हो गया शहीद
Sun, 07 May 2023 02:08 PM IST
Krishan Singh
मोनिता शर्मा/विनोद राणा, डरोह/पालमपुर(कांगड़ा)
मोनिता शर्मा/विनोद राणा, डरोह/पालमपुर(कांगड़ा)
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 07 May 2023 02:08 PM IST
सार
शहीद अरविंद कुमार एक अच्छे खिलाड़ी भी थे। उन्होंने इस खेल को सेना में भी जारी रखा। जहां पर उन्होंने कई मेडल जीते। खेल में अपने अच्छे प्रदर्शन के कारण वह सेना की ओर से एथलेटिक्स और शूटिंग में जर्मनी और सिंगापुर में भी खेल आए थे।
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शहीद अरविंद कुमार के पिता व परिजन।
- फोटो : संवाद
विस्तार
आतंकी हमले में शहीद हुए हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की मरहूं पंचायत के सूरी गांव के अरविंद कुमार के पिता को नहीं पता है कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। पिता उज्ज्वल सिंह घर के एक कोने में पड़े हुए हैं। वह घर पर आने जाने वाले हर आदमी को एकटक लगाकर देख रहे हैं। उन्हें कुछ भी सुध नहीं है। शहीद अरविंद के पिता उज्ज्वल सिंह लोक निर्माण विभाग में कार्य करते थे। करीब आठ साल पहले वह सेवानिवृत हो गए। सेवानिवृति के दो वर्षों के भीतर ही वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे और उनकी याददाश्त चली गई है। अरविंद ने अपने पिता के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी और सेना के कई अस्पतालों में उनका इलाज करवाया।
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चिकित्सकों ने अरविंद को बताया था कि उनके पिता की याददाश्त चली गई है और ऐसे में अब वह चमत्कार से ही वापस आ सकती है। दवाइयों का उन पर कोई असर नहीं हो रहा है। बीते लगभग छह वर्षों से वह बेसुध ही रह रहे हैं। उनकी टांग में एक घाव भी है जो लंबे समय से ठीक नहीं हो रहा है। उसका भी उपचार चला हुआ है। उधर, शहीद की माता निर्मला देवी कभी अपने पति को निहार रही हैं तो कभी बेटे की शहादत पर रो रही हैं और कभी अपनी बहू बिंदु को हौंसला दे रही हैं। दो दिनों से यही क्रम चल रहा है।
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नए कपड़े और खाने का सामान लेकर आएंगे पापा
वहीं शहीद की पत्नी बिंदु देवी को भी कोई सुध नहीं है। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि क्या करें। वह बार-बार दोनों बेटियों को समझा रही हैं कि उनके पापा नौकरी के लिए गए हैं और वह उनके लिए नए-नए कपड़े और खाने का सामान लेकर आएंगे।
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शहीद अरविंद ने खेलों में भी चमकाया था देश का नाम
शहीद अरविंद कुमार एक अच्छे खिलाड़ी भी थे। उन्होंने इस खेल को सेना में भी जारी रखा। जहां पर उन्होंने कई मेडल जीते। खेल में अपने अच्छे प्रदर्शन के कारण वह सेना की ओर से एथलेटिक्स और शूटिंग में जर्मनी और सिंगापुर में भी खेल आए थे। वहां पर उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया था। शहीद अरविंद कुमार के जीजा कल्याण चंद की माने तो वह घर पर आकर बेटियों में भी देश के प्रति जज्बा भरते थे।
वह सेना में एनएसजी कमांडो थे। उनका यह भी एक सपना था कि उनकी बेटियां भी बड़ी होकर नाम कमाएं। वह अपने मेडल भी बेटियों को दिखाते थे। अरविंद कुमार के रविवार को होने वाले अंतिम संस्कार में सरकार की ओर से पशुपालन मंत्री चौधरी चंद्र कुमार पहुंचेंगे।