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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Mandi Shivratri: The last Jaleb came out with great pomp at the end, a crowd gathered to see God in Chauhata's

मंडी शिवरात्रि: समापन पर धूमधाम से निकली अंतिम जलेब, छोटी काशी की खुशहाली के लिए देव आदि ब्रह्मा ने बांधी कार

Sat, 25 Feb 2023 06:23 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Sat, 25 Feb 2023 06:23 PM IST
सार

महोत्सव की चौथी और अंतिम जलेब (शोभायात्रा) रियासतकालीन राजदेवता माधोराय की अगुवाई में शाही अंदाज में निकली। जलेब में राज देवता माधोराय की पालकी के साथ एक दर्जन से अधिक देव रथ साथ चले।

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Mandi Shivratri: The last Jaleb came out with great pomp at the end, a crowd gathered to see God in Chauhata's
मंडी शिवरात्रि की अंतिम जलेब। - फोटो : संवाद

विस्तार

देवी-देवताओं की विदाई के साथ शनिवार को सात दिवसीय मंडी महाशिवरात्रि महोत्सव 2023 का समापन हो गया। महोत्सव की चौथी और अंतिम जलेब (शोभायात्रा) राजदेवता माधोराय की अगुवाई में शाही अंदाज में निकली। जलेब में राजदेवता माधोराय की पालकी के साथ एक दर्जन से अधिक देव रथ चले। देवताओं के साथ नाचते-गाते देवलुओं संग जलेब का नजारा देखते ही बन रहा था।

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जलेब में कृषि एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे। मेले का समापन वैसे तो राज्यपाल करते हैं, लेकिन व्यस्तता और अन्य कारणों से उनका दौरा रद्द हो गया। राज्यपाल की जगह कृषि एवं बागवानी मंत्री को बुलाया गया। उधर, महोत्सव की अंतिम जलेब को देखने के लिए सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ उमड़ी। इस बार शिवरात्रि के देव समागम में करीब 191 पंजीकृत देवी-देवता पहुंचे। शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर शनिवार को चौहटा की जातर के बाद दोपहर करीब सवा दो बजे जलेब शुरू हुई।
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कृषि मंत्री ने राजदेवता माधोराय और आराध्य देव बाबा भूतनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जलेब धूमधाम से चौहाटा, मोती बाजार, समेखतर, बालकरूपी, भूतनाथ बाजार होते हुए चौहाटा से पड्डल मैदान पहुंची। जलेब में सबसे आगे पुलिस घुड़सवारी, बैंड, पुलिस जवान, महिला पुलिस कर्मी मार्चपास्ट करते चल रही थीं। देवता छाजणू व छमाहूं जलेब में सबसे आगे रहे। इसके बाद कोटलू घटोत्कच, देव कोटलू, देव विष्णु मतलोड़ा, देव मगरू महादेव, बायला नारायण, देव चपलांदू नाग, सराज घाटी के देव बिट्ठू नारायण, लक्ष्मी नारायण, तुंगासी ब्रह्मदेव, महामाया निहरी, अंबिका नाऊ, राज देवता माधोराय की पालकी, शुकदेव ऋषि थट्टा, शुकदेव ऋषि शारटी आदि देवता जलेब में साथ चले। देव रथों के साथ ढोल, नगाड़े, शहनाई, रणसिंगों की धुनों पर देवलू भी नाचते गाते जलेब की शोभा बढ़ाई। जलेब पड्डल मैदान पहुंचने के बाद मुख्यतिथि ने शिवरात्रि महोत्सव का विधिवत समापन किया।
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छोटी काशी की खुशहाली के लिए देव आदि ब्रह्मा ने बांधी कार
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन शनिवार को प्राचीन परंपरा के अनुसार उत्तरशाल क्षेत्र के देव आदि ब्रह्मा ने छोटी काशी मंडी की परिक्रमा कर खुशहाली के लिए कार बांधी। इंदिरा मार्केट स्थित सिद्धकाली मंदिर के मुख्यद्वार सेरी बाजार से कार बांधने की प्रक्रिया शुरू हुई। सेरी मंच में देवता की कार बांधने के लिए काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे। देवता के साथ देवलू और कारदार वाद्य यंत्रों पर तलवारों के साथ नाचते गाते साथ चल रहे थे। मंडी शहर की खुशहाली और समृद्धि के लिए देव आदि ब्रह्मा ने कार बांधी। देव रथ के साथ गूर ने शहर की परिक्रमा करते हुए नगर वासियों की सुख समृद्धि के लिए कामना की। देवता के देवलुओं ने जौ के आटे को गुलाल की तरह हवा में उछाल कर बुरी आत्माओं को दूर भगाया। परिक्रमा कर देवता के साथ देवलू पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नाचते गाते चल रहे थे। अंतिम दिन टारना मंदिर में विराजमान जनपद के बड़ादेव कमरुनाग अपने मूल स्थान रवाना होने से पहले सेरी मंच की पौड़ियों पर कुछ देर के लिए बैठे। यहां सैकड़ों लोगों ने देव कमरुनाग के दर्शन किए। महाशिवरात्रि महोत्सव के आखिरी दिन देव समागम में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों से छोटी काशी गूंज उठी।

देवता कमरुनाग के दर्शनों के लिए लगीं कतारें
टारना मंदिर में सात दिन से ठहरे बड़ादेव कमरुनाग ने देवी-देवताओं को विदा करने के लिए चौहाटा जातर में पहुंचे। इसके बाद सेरी मंच की पौड़ियों के पास थोड़ी देर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। देव कमरुनाग के दर्शन के सेरी की पौड़ियों पर लंबी कतारें लगी रहीं।

चौहाटा की जातर में देव दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

Mandi Shivratri: The last Jaleb came out with great pomp at the end, a crowd gathered to see God in Chauhata's
दर्शनों के लिए पहुंचे लोग। - फोटो : संवाद

सात दिन तक छोटी काशी मंडी में सजा देव समागम देवी-देवताओं की विदाई के साथ संपन्न हो गया है। शनिवार को शिवरात्रि के अंतिम दिन चौहाटा की जातर में देव दर्शन को जन सैलाब उमड़ पड़ा।जनमानस ने देवी-देवताओं को चढ़त चढ़ाई तो देवताओं ने शेष देकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। दोपहर को एक-एक कर देवी-देवता मूल स्थानों के लिए रवाना हो गए। इस दौरान देवी-देवताओं ने एक-दूसरे से गले मिल कर अगले साल मिलने की आस के साथ विदाई ली।

देव मिलन से छोटी काशी भावुक हो उठी। शिवरात्रि के देव समागम में लगा देवी देवताओं ‘महाकुंभ’ में शुक्रवार को चौहाटा जातर की में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह सात बजे से देवी-देवता चौहटा में विराजमान हो गए थे। दिन चढ़ते ही देव दर्शन के लिए भी लोग उमड़ने शुरू हो गए। सनोर बदार, उत्तरशाल, सराज, चौहार और बल्ह घाटी से आए देवी देवताओं के समक्ष हजारों की संख्या में लोगों ने शीश नवाया। देव संस्कृति के प्रति लोगों की अटूट आस्था दिखी।

लोगों ने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए चढ़त चढ़ाई। चौहाटा जातर से मंडी शहर भक्ति में डूब गया। हजारों लोग देव मिलन के इस अदभुत क्षणों के गवाह बने। चौहटा में एक साथ कतारबद्ध विराजमान डेढ़ सौ से अधिक देवी-देवताओं के दर्शन के लिए सुबह सात बजे से लोगों का तांता लगने लगा था। दोपहर एक बजे के बाद देवी-देवता अपने मूल स्थानों के लिए रवाना होने लगे थे। दोपहर साढ़े बारह बजे एक-एक कर के देवी-देवता मूल स्थानों के लिए रवाना होने लगे थे। देव मिलन के देवी-देवताओं ने शिवरात्रि से विदाई ली। सात दिनों तक वाद्य यंत्रों से गुंजायमान मंडी शहर देवताओं के लौटते ही भक्तिमय माहौल पूरी तरह शांत हो गया है।

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