मंडी हादसाः जांच में हुआ एक बड़ा खुलासा
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लारजी का पानी छोड़ने से ठीक पहले पार्वती बांध से पानी छोड़ा गया था। यानि एक साथ दो बांधों से पानी छोड़ा गया था। इसी के कारण इतनी बड़ी तबाही हो गई। दोनों बांधों से छोड़े गए पानी के चलते ब्यास का जलस्तर एकाएक इतना बढ़ गया था कि इंजीनियरिंग छात्रों को संभलने का मौका ही नहीं मिला।
अभी तक सभी इस हादसे के लिए लारजी प्रोजेक्ट प्रबंधन की लापरवाही ही मान रहे थे। मगर जांच में पता चला कि दूसरे प्रोजेक्ट में भी लापरवाही बरती गई थी।
ग्रिड बचाने की खातिर छोड़ा गया पानी
ग्रिड फेल होने से बचाने के लिए सबसे पहले पार्वती प्रोजेक्ट से पानी छोड़ा गया। उसके ठीक कुछ समय बाद लारजी बांध से पानी छोड़ा गया।
ऐसी स्थिति में दोनों बांधों का पानी की गति काफी तेज हो गई, जिसका नतीजा रहा कि हैदराबाद से आए 24 छात्रों और एक टूर गाइड को समझने का कुछ भी मौका नहीं मिला।
देखते ही देखते एक के बाद एक ब्यास नदी में बह गए। बहाव इतना तेज था कि जो तैरना जानते थे वे भी नहीं बच पाए। इनमें कईयों के शव की तलाश आज भी जारी है।
चंद मिनटों में पानी ने मचाई तबाही
दोनों डैम के बीच की दूरी लगभग 60 किलोमीटर के आसपास है। ऐसे में पार्वती से लारजी तक पानी पहुंचने में चंद समय लगा। इस सच सरकार के आला अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं।
प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी ने बताया कि पार्वती बांध से 250 क्यूमैक्स पानी छोड़ा गया था। जबकि, लारजी में पहले से ही पानी था, जिसे छोड़ने के लिए स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर की ओर से निर्देश जारी किए गए थे।
दोनों बांधों का पानी एक साथ मिलने से उसकी गति तेज हो गई। इसका नतीजा सबके सामने हैं।
बंद होंगी ब्यास के लिए निकाली सड़कें
थलौट हादसे के बाद अब ब्यास के लिए निकाली खनन माफिया की सड़कों को बंद किया जाएगा। सरकार के आदेशों पर डीसी मंडी ने इन संपर्क सड़कों और कच्चे रास्तों को तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं।
डीसी मंडी ने वन विभाग, एनएच और खनन विभाग को कार्रवाई के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। इसके अलावा ब्यास के किनारे के सारे रास्तों को बंद करने के साथ ही जगह-जगह टूटी फेसिंग को लगाने और ब्यास से रेत बजरी उठाने वालों पर पूरी तरह नकेल कसने के निर्देश दिए हैं।
एनएच पर से ब्यास को जोड़ने के खनन माफिया द्वारा बनाई गई इन सड़कों के मामले पर उपायुक्त मंडी ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने इस बाबत खनन अधिकारी मंडी को तलब कर तीन विभागों को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
नौसेना के गोताखोरों ने खंगाली ब्यास
मंडी हादसे के पांचवें दिन भी लापता छात्रों की तलाश में खास सफलता न मिलने पर इंडियन नेवी, एनडीआरएफ के विशेषज्ञ व अनुभवी गोताखोरों ने वीरवार को मंडी पहुंचकर शवों को ढूंढने का अभियान शुरू किया।
पूरे दिन में कुल दो शव बरामद किए गए। इंडियन नेवी के कमांडेंट सुब्रह्मणयम की अगुवाई में सात सदस्यीय गोताखोरों की टीम हेलिकॉप्टर से मंडी के पड्डल ग्राउंड पहुंची। इसके बाद टीम ने पंडोह डैम पहुंच सर्च आप्रेशन की प्लानिंग तैयार की और घटनास्थल सारानाल गई।
नेवी के एक्सपर्ट गोताखोरों ने ब्यास नदी में सर्च आप्रेशन शुरू किया। जिन स्थानों पर शव फंसे होने की संभावना थी, वहां गोताखोर पानी में उतरे, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली। नेवी के गोताखोर अंडरवाटर कैमरों से लैस हैं।
जागी सरकार, लगाए दो हाईपावर सायरन
लारजी हादसे से सबक लेते हुए राज्य बिजली बोर्ड ने डैम साइट में अब दो नए हाई पावर सायरन लगाए हैं। वीरवार को थलौट डैम साइट और टेल रेस पावर हाउस के पास दो नए उच्च क्षमता वाले सायरन की टेस्टिंग की गई।
इन नए सायरन की आवाज पहाडि़यों के बीच दूर तक सुनी जा सकती है। अब लारजी परियोजना क्षेत्र में पांच सायरन हो गए हैं। इसके अलावा पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सतर्क करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगा दिए हैं।
इन बोर्डों पर हिंदी और अंग्रेजी में संदेश लिखे हैं। राज्य बिजली बोर्ड के जनसंपर्क अधिकारी अनुराग पराशर ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार बिजली बोर्ड परियोजना स्थल में सतर्कता प्रणाली को और पुख्ता बना रहा है।