हर हाल में बहाल रहेगा मनाली-लेह मार्ग
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भारत-पाक सीमा पर मौजूदा हालात को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने बीआरओ को नए निर्देश दिए हैं कि वे दिसंबर माह तक हर हालत में सामरिक महत्व के मनाली-लेह मार्ग को बहाल रखें। कारगिल को जोड़ने वाले इस मार्ग के महत्व को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने उक्त फैसला लिया है।
कश्मीर में बाढ़ के दौरान भी इस मार्ग से सैन्य वाहनों और राशन की सप्लाई हुई थी। कई सैलानी भी इसी मार्ग से घाटी से बाहर निकले थे। रोहतांग दर्रा आधिकारिक तौर पर 15 नवंबर से बंद होता है जबकि केलांग-लेह मार्ग 15 सितंबर के बाद बंद कर दिया जाता था। इस बार इसे खुला रखा गया है।
38 बीआरटीएफ के कमांडर कर्नल राजेंद्र कुमार ने बताया कि इस बार दिसंबर तक मनाली-लेह मार्ग को खुला रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि चाहे जितनी भी मुश्किल चुनौती क्यों न हो सीमा सड़क संगठन दिसंबर के अंत इन दर्रोें को यातायात के लिए खुला रखेगा। बर्फबारी के बाद मार्ग को तुरंत बहाल करने का प्रयास रहेगा। उन्होंने कहा कि सीमा पर बिगड़े हालातों के बाद मनाली-लेह मार्ग पर सेना के वाहनों की आवाजाही बढ़ी है।
लेह मार्ग में आते हैं सात दर्रे
मनाली से लेह जाते समय समुद्र तट से 13050 फुट ऊंचा रोहतांग पास, 16049 फुट ऊंचा बारालाचा दर्रा, 15600 फुट ऊंचा नुकीला दर्रा, 17580 फुट ऊंचा तंगलंग ला दर्रा, 16000 फुट ऊंचा लाचोलुंग ला दर्रा, 17590 फुट ऊंचा चांगला दर्रा और 18379 फुट की ऊंचाई पर खारदुंगला दर्रा पार करना पड़ता है।
यहां का मौसम हमेशा माइनस के आसपास रहता है। बस के जरिये 434 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह मार्ग में 19 घंटे लगते हैं। बस दूसरे दिन लेह पहुंचाती है।