कुश्ती को पहचान दिलाई, 74 नेशनल खिलाड़ी तैयार किए, सरकारों ने पूछा तक नहीं
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हिमाचल को कुश्ती में पहचान देने वाले पहलवान जगदीश को सरकार से प्रोत्साहन न मिलने का मलाल है। उनका कहना है कि हिमाचल को मेडल दिलवाने और कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने के बावजूद उन्हें पूछा तक नहीं गया है।
कई ऐसे खिलाड़ी भी हैं, जो परशुराम अवार्ड ले चुके हैं। पहलवान और पंजागाई स्कूल के डीपीई जगदीश ने कहा कि उन्होंने हिमाचल को कुश्ती में पहचान दिलाई है। सरकार को चाहिए कि वह यहां भी एक अखाड़ा खोल दे, ताकि खिलाड़ी प्रशिक्षण लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूबे का नाम चमका सकें।
बताया कि 1994 में उन्होंने हिमाचल कुमार और आल हिमाचल प्रतियोगिता का खिताब जीता है। वर्ष 1994 में 1996 में सीनियर नेशनल का खिताब भी उन्हीं के नाम रहा। 1998 में हिमाचल केसरी बने।
बतौर डीपीई दिए 74 नेशनल खिलाड़ी
1994 से 2005 तक अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले के खिताब पर कब्जा किया। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में भी पांच बार विजेता रहे हैं।
हिमाचल सरकार की ओर से ऊना में करवाई जाने वाली हिमाचल केसरी स्पर्धा का खिताब वे तीन बार जीत चुके हैं। अब चंडीगढ़ में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रदेश को गोल्ड मेडल दिलाया, लेकिन किसी भी सरकार ने उनके बारे में नहीं पूछा।
जगदीश ने कहा कि उन्होंने पंजगाई स्कूल में बतौर डीपीई 74 नेशनल खिलाड़ी तैयार किए हैं। कई खिलाड़ियों को परशुराम अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। जगदीश पंजगाई स्कूल में डीपीई के पद पर कार्यरत हैं।
उधर, वन, परिवहन व युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। इस बारे में सदर के विधायक से बात की जाएगी। विधायक जिस तरह का प्रपोजल सरकार को भेजेंगे, उसे मंजूर कर मांगों को पूरा किया जाएगा।