फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Malabar Neem Project Research completed Farmer will be benefited

Himachal News: शोध कार्य पूरा, किसानों को मालामाल करेगा मालाबार, 1100 पौधे देंगे 15 लाख रुपये की आय

Tue, 20 Jun 2023 12:23 PM IST
अरविन्द ठाकुर पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (हमीरपुर)
पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (हमीरपुर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Tue, 20 Jun 2023 12:23 PM IST
सार

एक हेक्टेयर भूमि पर 10 फीट की दूरी पर 1,100 के करीब मालाबार नीम के पौधे रोपे जाएं, तो छह वर्षों में 15 लाख रुपये की कमाई हो सकेगी। छह वर्ष का पौधा होने पर इसे प्लाईवुड उद्योग में बेचा जा सकता है।

विज्ञापन
Malabar Neem Project Research completed Farmer will be benefited
मालाबार नीम पर शोध कार्य पूरा। - फोटो : संवाद

विस्तार

उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी हमीरपुर के वानिकी विभाग ने मालाबार नीम पर शोध कार्य पूरा कर लिया है। साल 2017 में यह शोध शुरू हुआ था। किसान सफेदा व पॉपुलर जैसे पौधों के बजाय अब मालाबार नीम के पौधे लगाकर अपनी आर्थिक मजबूत कर सकेंगे। शोध के बाद वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि 600 से 1800 मीटर तक के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस पौधे को आसानी से उगाया जा सकता है। इसके अलावा जहरीली हवा के दुष्प्रभावों को भी मालाबार नीम कम करेगा।

विज्ञापन


आमतौर पर किसान बंजर भूमि पर सफेदा व पॉपुलर के पौधे लगाते हैं। सफेदा पानी यानी नमी को सोख लेता है तो पॉपुलर के पत्तों के झड़ने से खेतों में फसल की पैदावार नहीं होती। लेकिन अब यदि एक हेक्टेयर भूमि पर 10 फीट की दूरी पर 1,100 के करीब मालाबार नीम के पौधे रोपे जाएं, तो छह वर्षों में 15 लाख रुपये की कमाई हो सकेगी। छह वर्ष का पौधा होने पर इसे प्लाईवुड उद्योग में बेचा जा सकता है। 10 वर्ष आयु का होने पर फर्नीचर इंडस्ट्री को इसे आसानी से बेचा जा सकता है।
विज्ञापन


यह पौधा कृषि वानिकी के लिए उपयुक्त है। अगर किसान इसे फसल के बीच में भी रोपेगा, तब इसके पत्ते फसल के बीच में गिरते हैं तो खाद का काम करेंगे। यही नहीं, इसके पत्ते एंटी डरमाइटस (दीमक रोधी ) के रूप में भी काम करेंगे। मुख्य शोधकर्ता व वानिकी विभाग में कार्यरत सहायक प्रोफेसर डॉ. दुष्यंत कुमार शर्मा ने बताया कि वर्ष 2017 में वानिकी अनुसंधान केंद्र देहरादून ने मालाबार नीम की 10 प्रजातियां जारी की थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनमें से एक मेलिआ दुबिया नाम की प्रजाति के पौधे डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन को उपलब्ध हुए थे। इन्हें नेरी महाविद्यालय के लिए शिफ्ट करके शोध कार्य शुरू किया था। शोध के दौरान यह पाया गया कि यह पौधा किसानों के लिए पॉपुलर व सफेदे से अधिक लाभकारी हो सकता है। दावा किया कि राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार हुए शोध से पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी बड़ी बात निकलकर सामने आई है।

यदि इस पौधे को औद्योगिक क्षेत्रों में लगाया जाए तो उद्योगों से निकलने वाली जहरीली हवा के दुष्प्रभावों को भी कम करने की क्षमता  रखता है। बद्दी-बरोटीवाला जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में आए दिन लेड, जिंक, कॉपर आदि जैसे हेवी मेटल हवा में रिलीज होते हैं जो वहां की मिट्टी में मिलकर अनाज को भी दूषित करते हैं। इसी वजह से कैंसर जैसी घातक बीमारियां अब ज्यादा होने लगी हैं। इसलिए इस स्थान पर इन पौधों का बहुत लाभ होगा। इसके लिए  हाल ही में महाविद्यालय ने निदेशक पर्यावरण विज्ञान व बॉयोटेक्नोलॉजी शिमला को एक पत्र भी लिखा है। 


शोध कार्य करने के लिए 10 लाख रुपये की फंडिंग मांगी गई है। डॉ. शर्मा ने कहा कि वैसे तो महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इसके ऊपर शोध करने में सफलता हासिल कर ली है लेकिन व्यावहारिक तौर पर भी औद्योगिक क्षेत्रों की मिट्टी लाकर गहन शोध करने भी आवश्यकता है।  डीन डॉ. सोमदेव शर्मा ने कहा कि महाविद्यालय के वैज्ञानिक और विद्यार्थी शोध कार्यों में गहन रुचि दिखा रहे हैं। इसका लाभ किसानों व बागवानों  को होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed