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एंट्री प्वाइंट पर 1000 गाड़ियों की पार्किंग बनाए प्रशासन: हाईकोर्ट

Tue, 28 Mar 2017 09:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 28 Mar 2017 09:23 AM IST
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Make Parking site for 1000 vehicles at shimla entry point: High Court
हिमाचल हाईकोर्ट

प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को कसुम्पटी-छोटा शिमला संपर्क मार्ग पर गाड़ियों की आवाजाही पर लगे सुबह शाम के प्रतिबंध को रविवार और राजपत्रित अवकाश के दिन नहीं लगाने के आदेश दिए। कोर्ट ने जिला प्रशासन की 16 जुलाई 2016 की अधिसूचना पर आगामी आदेशों तक रोक लगाते हुए संजौली-आईजीएमसी सड़क पर बिना परमिट के गाड़ियों को चलाने पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध भी लगा दिया है।

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इस मार्ग पर आपातकालीन गाड़ियां और मरीजों को लाने ले जाने वाली गाड़ियां ही चल सकेंगी। इसके अलावा शिमला शहर के एंट्री प्वाइंट पर करीब 1000 गाड़ियां खड़ी करने लायक पार्किंग बनाने के लिए स्थान चिन्हित करने के आदेश भी दिए गए है। मामले पर अगली सुनवाई 13 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
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न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किए। कोर्ट ने शिमला शहर के सभी एंबुलेंस सड़कों पर वाहनों की पार्किंग पर प्रतिबंध लगाने के आदेश भी जारी किए। कोर्ट ने संजौली-आईजीएमसी मार्ग पर किसी भी तरह के वाहनों को पार्क किए जाने पर भी रोक लगाने के आदेश दिए। 
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सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस मार्ग पर धड़ल्ले से बिना परमिट वाली गाड़ियां दौड़ाई जा रही हैं। जिससे पैदल चलने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। जगह-जगह सड़कें गड्ढों से भरी पड़ी हैं और गाड़ियों के दौड़ने से सड़कों पर धूल ही धूल बिखर जाती है।

यही हालत शिमला शहर के अन्य हिस्सों में भी बनी हुई है। सड़कों को जब चाहे उखाड़ दिया जाता है, जिससे सड़कों पर एक तरफ  मलबा बिछ जाता है और दूसरी तरफ  गाड़ियां दौड़ रही होती हैं। सड़कों को चौड़ा करने का कार्य भी आजकल जोरों से जारी है लेकिन इसको व्यवस्थित तरीके से अंजाम नहीं दिया जा रहा। 

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाओ
कोर्ट ने मुख्य सचिव को अपनी अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन करने के आदेश भी दिए। यह सुझाव देने के आदेश भी दिए गए हैं कि किस तरह सड़कों को बिजली, टेलीफोन और पानी के नेटवर्क को बिछाने के लिए बार- बार खोदे जाने से बचाया जा सकता है। कोर्ट ने सड़कों के किनारे किए जा रहे अवैध कब्जों को अदालती आदेशों के बावजूद रोक न लगा पाने पर भी खेद जताया और उक्त कमेटी को आदेश दिए कि वह यह देखे कि कोर्ट के अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ  दिए गए आदेशों की कितनी अनुपालना हुई। 

ट्रैफिक जाम से खतरे में लोगों की जान
संजौली- ढली बाईपास पर ही कई स्थानों पर जगह जगह मलबा फेंका गया है और कुछ एक स्थानों डिमार्केटेड प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट लैंड पर ढाबे बना कर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। इन ढाबों में गुपचुप तरीके से बिजली और पानी मुहैया करवा दी गई है। यह सब वन, बिजली और नगर निगम के ध्यान में होते हुए किया जा रहा है। इन अवैध ढाबों के आसपास गाड़ियों के खड़े रहने से एक तरफ  जहां ट्रैफि क जाम लगा रहता है वहीं आम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ी रहती है।

आईजीएमसी के आसपास पार्किंग की संभावना तलाशे
कमेटी को आईजीएमसी के आसपास किसी बड़ी पार्किंग बनाने की संभावना को तलाशने के आदेश भी दिए हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल की अपनी एक भी बड़ी पार्किंग नहीं है। बीमार और तीमारदारों को लाने ले जाने वाली गाड़ियों को शहर की अन्य सड़कों पर ही पार्क करना पड़ता है। इससे आईजीएमसी के आसपास की सड़कों पर जहाँ तहां गाड़ियां खड़ी होने से ट्रैफि क जाम लग जाता है और कई बार तो एंबुलेंस भी घंटों तक जाम में फं सी रहती है। 

नवबहार से रामचंद्रा चौक को प्रतिबंधित करने का सुझाव
कोर्ट ने कमेटी को नवबहार से रामचंद्रा चौक और एंबुलेंस सड़कों पर अन्य गाड़ियों को प्रतिबंधित करने पर सुझाव देने के आदेश भी दिए। कमेटी को सड़कों पर तारकोल बिछाने का काम समयबद्ध करने पर नियम बनाने को भी कहा गया है। शिमला शहर में केवल छोटी बसें चलाए जाने की संभावनाएं तलाशने को कहा गया है।

हाईकोर्ट पहुंचा धर्मशाला को राजधानी बनाने का मामला

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हिमाचल सरकार की ओर से धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी बनाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। प्रार्थी परेश शर्मा ने याचिका दायर कर प्रदेश सरकार के इस फैसले को गैरकानूनी और मनमाना बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार का यह फैसला जनहित में नहीं है। इसे वापस लिया जाए। हाईकोर्ट ने प्रार्थी की याचिका पर फिलहाल प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करने से इंकार कर दिया है। 

मामले पर सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने प्रार्थी परेश शर्मा को अगली सुनवाई के दौरान याचिका की गुणवत्ता को स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट में धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने की तीन मार्च की अधिसूचना को चुनौती दी है। 

प्रार्थी का आरोप है कि सरकार ने यह फैसला एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स कमीशन की सिफारिशों के बगैर लिया गया है। यह फैसला लेने में प्रदेश की वित्तीय और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखा गया है। प्रार्थी का कहना है कि हिमाचल जैसे छोटे

राज्य में दो राजधानियों की जरूरत समझ से परे है। प्रदेश पहले ही 45 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। ऐसे में दूसरी राजधानी जैसा फैसला जनहित में कभी हो ही नहीं सकता। प्रार्थी ने कोर्ट से दूसरी राजधानी की अधिसूचना खारिज किए जाने की मांग की है। मामले पर सुनवाई 18 अप्रैल को होगी।

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