फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Maize crop in Hamirpur affected by fall army worm, Deputy Director of Agriculture gave this advice to farmers

Hamirpur: फॉल आर्मी वर्म की चपेट में मक्की की फसल, कृषि उपनिदेशक ने किसानों को दी ये सलाह

Thu, 25 Jul 2024 12:26 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Published by: Krishan Singh Updated Thu, 25 Jul 2024 12:26 PM IST
सार

कृषि उपनिदेशक हमीरपुर डॉ. शशिपाल अत्री ने कहा की जिले में मक्की को बचाने के लिए कृषि विभाग के पास कोराजन कीटनाशक सभी विकास खंडों में उपलब्ध है। कोराजन का पहला स्प्रे बुआई के दस दिन बाद मक्की के पत्तों के भंवर में करें।

विज्ञापन
Maize crop in Hamirpur affected by fall army worm, Deputy Director of Agriculture gave this advice to farmers
कृषि उपनिदेशक हमीरपुर डॉ. शशिपाल अत्री - फोटो : संवाद

विस्तार

हमीरपुर जिले में मक्की की फसल में लग रहे फॉल आर्मी वर्म(कीट) की रोकथाम के लिए कृषि विभाग ने कीटनाशक दवाइयां  लेकर किसानों को जागरूक करने का कार्य शुरू कर दिया है।  कृषि उपनिदेशक हमीरपुर डॉ. शशिपाल अत्री ने कहा की जिले में मक्की को बचाने के लिए कृषि विभाग के पास कोराजन कीटनाशक सभी विकास खंडों में उपलब्ध है। कोराजन का पहला स्प्रे बुआई के दस दिन बाद मक्की के पत्तों के भंवर में करें। स्प्रे को सुबह के शुरुआती घंटों में या शाम के समय में करना चाहिए और स्प्रे नोजल को पत्ती भंवर की ओर रखा जाना चाहिए, जिसमें लार्वा आमतौर पर फीड करते हैं। बुआई के 18-22 दिन के बाद स्प्रे को दोहराएं।

विज्ञापन

 

 डॉ. शशिपाल अत्री ने कहा कि खरीफ मक्की की फसल में फॉल आर्मी वर्म का अधिक प्रकोप दिखाई दे रहा है। इसका अधिक प्रकोप होने पर फसल को एक ही रात में भारी नुकसान पहुंच सकता है। इस कीट की व्यस्क मादा मोथ पौधों की पत्तियों और तनों पर अंडे देती है। एक बार में मादा 50-200 अंडे देती है। यह अंडे 3-4 दिन में फूट जाते हैं तथा इनसे निकलने वाले लार्वा 14-22 दिन तक इस अवस्था में रहते हैं।

कीट के लार्वा के जीवन चक्र की तीसरी अवस्था तक इसकी पहचान करना मुश्किल है, लेकिन चौथी अवस्था में इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है। डॉ. अत्री ने कहा कि चौथी अवस्था में लार्वा के सिर पर अंग्रेजी के उल्टे ‘वाई’ आकार का सफेद निशान दिखाई देता है। इसके लार्वा पौधों की पत्तियों को खुरचकर खाता है, जिससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देती हैं। जैसे-जैसे लार्वा बड़ा होता है, पौधों की ऊपरी पत्तियों को खाता है और बाद में पौधों के भुट्टे में घुसकर अपना भोजन प्राप्त करता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

80 से अधिक फसलों को पहुंचाता है नुकसान
 उपनिदेशक ने कहा कि यह कीट बहु फसल भक्षी है, जो 80 से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचाता है। अगर समय रहते फॉल आर्मी वर्म कीट की पहचान कर इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में मक्की एवं अन्य फसलों में भारी तबाही हो सकती है। फसल के लिए लार्वा अवस्था हानिकारक होती है। उन्होंने किसानों से कहा कि भूमि की गहरी जुताई करें, ताकि कीट की लार्वा अवस्था या प्यूपा भूमि में गहरा दब जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed