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हिमाचल: चंबा जिले में भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 3.6 रही तीव्रता

Thu, 09 Sep 2021 08:49 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 09 Sep 2021 08:49 PM IST
सार

भूकंप के झटका कांगड़ा जिले के कई भागों के अलावा चंबा में भी महसूस हुआ। भूकंप आते ही कई लोगों अपने घरों से बाहर निकल गए। हालांकि, भूकंप से किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। बता दें इससे पहले भी चंबा जिले में कई बार भूकंप आता रहा है। 
 

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magnitude of 3.6 Earthquake tremors in Chamba districts of himachal
भूकंप(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में गुरुवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र चंबा जिले में जमीन के अंदर पांच किलोमीटर गहराई पर था और इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.6 मापी गई। भूकंप के चंबा से सटे  कांगड़ा जिले के कई भागों में भी महसूस हुआ। भूकंप आते ही कई लोगों अपने घरों से बाहर निकल गए। हालांकि, भूकंप से किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। धर्मशाला में रहने वाले रियांश, सचिन, अभिषेक, हर्ष, तमन्ना, शिवानी, कार्तिका और तनुजा ने बताया कि देरशाम आए भूकंप से वे सहम गए थे। भूकंप के झटके लगने के तुरंत बाद वे घरों से बाहर निकलकर खुले स्थान में आ गए थे।

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बता दें, हिमाचल जोन पांच यानी भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील वर्ग में आता है। इंडियन प्लेट में हिमाचल भी आता है। इंडियन प्लेट यूरोशिया प्लेट के नीचे है। दोनों प्लेटों में गहरा तनाव चल रहा है। चार अप्रैल 1905 को हिमाचल में 7.8 तीव्रता वाला बड़ा भूकंप आ चुका है। इसके बाद हिमाचल में बड़े भूकंप अक्सर आते रहे हैं। 28 फरवरी 1906 को कुल्लू में 6.4 तीव्रता वाला बड़ा भूकंप आ चुका है। वर्ष 1930 में भी 6.10 तीव्रता वाला भूकंप आया था। इसके बाद वर्ष 1945 में 6 और 1975 में 6.8 तीव्रता वाला भूकंप आया था।
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 प्रदेश के चंबा, कुल्लू, कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, मंडी, बिलासपुर जोन पांच और लाहौल-स्पीति, शिमला, सिरमौर, सोलन जोन 4 में आते हैं।  विशेषज्ञों के अनुसार लोगों को बेतरतीब निर्माण के बजाय भूकंपरोधी घर ही बनाने चाहिए ताकि आपदा के समय उनकी जिंदगी बच सके। हिमाचल सरकार को स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा मॉकड्रिल करवानी चाहिए। हर स्कूल के कमरे में एक बड़ा मजबूत टेबल होना चाहिए ताकि भूकंप के दौरान बच्चे उसके नीचे सुरक्षित बच सकें। 

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