अनपढ़ आदमी ने बनाया लकड़ी का अनोखा कंप्यूटर
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फाजिल पढ़ा-लिखा नहीं है लेकिन लकड़ियों से कंप्यूटर बनाकर उसने अपने हुनर को साबित कर दिया है। हुनर और दिल में नया करने की ख्वाहिश में फर्नीचर की दुकान में काम करने वाले अनपढ़ फाजिल ने हाईटेक जमाने में कंप्यूटर फ्रेम बनाने की ठानी।
काफी कोशिशों के बाद फाजिल को यह कामयाबी मिली। फिर उसने ऊना जिले के कंप्यूटर इंजीनियर भूपिंद्र सिंह की मदद लेकर मशीनरी फिट कराई। इस तरह लकड़ियों से बना कंप्यूटर ऑन हो गया।
शिमला से चार किलोमीटर दूर बड़श गांव में रहने वाले 40 वर्षीय मोहम्मद फाजिल देवदार, साल और टीक की लकड़ी से कंप्यूटर का मॉनिटर, सीपीयू, की-बोर्ड, माउस की फ्रेम तैयार करता है। फाजिल ने बताया कि पहले वह फर्नीचर बनाता था।
कंप्यूटर की खासियतें
फ्रेम में कंप्यूटर स्क्रीन फिट करने के लिए लोहे के सिर्फ 4 नट लगे हैं, जबकि पूरी फ्रेम, माउस, की-बोर्ड, सीपीयू में इस्तेमाल की गई लकड़ी को आपस में जोड़कर तैयार किया गया है।
भूपिंद्र के मुताबिक कंप्यूटर की कीमत लकड़ी और पॉलिश के हिसाब से तय होती है। 22 से 30 हजार रुपये में इन कंप्यूटरों को बेचा जा रहा है।
अब तक 10 कंप्यूटर बिक चुके हैं और 30 की फ्रेम तैयार हैं। कंप्यूटर की फ्रेम तैयार करने में 15 दिन और मशीनरी फिट करने में एक महीना लग रहा है।
दूसरे राज्यों से आ रही डिमांड
कामकाज के दौरान ही उसकी मुलाकात एक इंजीनियर से हुई। हाईटेक जमाने में आइडिया आया कि क्यों न कंप्यूटर की फ्रेम तैयार की जाए।
फिर क्या था, पूरी लगन के साथ फाजिल भूपिंद्र सिंह के साथ इस अभियान में जुट गया। दोनों ने न केवल लकड़ी के फ्रेम वाला कंप्यूटर तैयार किया बल्कि अब तक इनके बनाए 10 कंप्यूटर भी बिक चुके हैं।
इंजीनियर भूपिंद्र सिंह ने बताया कि हिमाचल में कंप्यूटर की मांग कम है, जबकि चंडीगढ़, मुंबई और दिल्ली से लकड़ी के बने इन कंप्यूटरों की डिमांड आ रही है। कंप्यूटर तैयार करने में ज्यादा समय लग रहा है। इसलिए ऑर्डर भी कम लिए जा रहे हैं।