सुखराम ने चौथी बार बदला दल, परिवार सहित कांग्रेस में हुए शामिल, पोते आश्रय को दिलाया टिकट
लोकसभा चुनाव में हिमाचल की हॉट सीट मंडी में भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंकी। कांग्रेस के गढ़ रहे मंडी संसदीय क्षेत्र में जिले से पहली बार मुख्यमंत्री बने जयराम ठाकुर की प्रतिष्ठा दांव पर है।
दूसरी ओर छह दशक के राजनीतिक सफर में चौथी बार दल बदल कर फिर कांग्रेस का हाथ थामने वाले सुखराम परिवार का राजनीतिक भविष्य दांव पर है। हिमाचल की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले सुखराम ने इस बार फिर पाला बदला है।
महज डेढ़ साल के भीतर ही उन्होंने फिर कांग्रेस का दामन थामकर भाजपा को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के गृह संसदीय क्षेत्र से झटका दिया है। उनका परिवार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आया था।
लोकसभा चुनाव में मंडी संसदीय क्षेत्र से टिकट न मिलने से नाराज चल रहे जयराम सरकार के ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा ने 25 मार्च को अपने दादा पंडित सुखराम के साथ कांग्रेस की सदस्यता ली। इसके बाद कांग्रेस ने आश्रय शर्मा को मंडी लोकसभा सीट से टिकट दिया।
1998 में कांग्रेस से अलग होकर किया हिविकां का गठन
हिमाचल में राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री पंडित सुखराम ने छह दशकों के सियासी करियर में ऐन मौके पर चौथी बार पाला बदला है। उन्होंने पहली बार 1998 में कांग्रेस से अलग होकर हिमाचल विकास कांग्रेस पार्टी का गठन किया था।
कांग्रेस के राज में केंद्रीय मंत्री रहते पंडित सुखराम दूरसंचार घोटाले में घिरने के चलते पार्टी से निष्कासित कर दिए गए थे। 1998 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस को 31-31 सीटें मिलीं लेकिन, सुखराम की हिविकां ने धूमल को समर्थन देकर वीरभद्र के नेतृत्व वाली कांग्रेस को महज एक सीट के अंतर से सरकार बनाने से रोक दिया।
भाजपा की सरकार में धूमल मुख्यमंत्री बने। पंडित सुखराम ने इसके बाद वर्ष 2003 में परिवार समेत कांग्रेस में वापसी कर ली। उनके बेटे अनिल शर्मा ने सदर से चुनाव लड़ा और सरकार में मंत्री बने। इसके बाद से सुखराम परिवार वर्ष 2017 तक कांग्रेस में रहा।
लेकिन विधानसभा चुनाव के साल 2017 में वीरभद्र सिंह से नोकझोंक पर चुनाव से ऐन पहले सुखराम परिवार भाजपा में शामिल हो गया। अनिल शर्मा उस वक्त कांग्रेस की वीरभद्र सरकार में पंचायती राज मंत्री थे। अब लोकसभा चुनाव से ऐन पहले पंडित सुखराम शर्मा ने पोते आश्रय के साथ कांग्रेस का दामन थामा।