लोकसभा चुनाव रिजल्ट: इन कांग्रेस प्रत्याशियों ने ईवीएम पर फोड़ा हार का ठीकरा, ये कहा
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कांग्रेस उम्मीदवार कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि उन्हें मतदाताओं से कोई शिकायत नहीं है। उन्हें जिन लोगों ने समर्थन दिया, उनका वे धन्यवाद करते हैं, लेकिन चुनाव आयोग की नियत पर उन्हें जरूर संदेह है। कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि ईवीएम सही से अपना काम नहीं कर पाई।
इस वजह से उन्हें इतनी बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस बार मोदी लहर इतनी प्रचंड नहीं थी। बावजूद इसके इतने अधिक वोट आना सवाल खड़े जरूर करता है।
शांडिल ने कहा कि वे सोलन सदर से विधायक हैं और बतौर जनप्रतिनिधि अपना कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में बहुत से लोगों ने उन्हें समर्थन दिया, जिनका वे दिल से धन्यवाद करते हैं।
उन्होंने कहा कि वे लोगों की सेवा में तत्पर रहेंगे। कर्नल धनीराम शांडिल वीरवार को शिमला में ही अपने निवास स्थान पर रहे। चुनाव परिणाम के बाद उनके घर लोगों का तांता लग गया और बड़ी संख्या में लोग उन्हें दिलासा देने पहुंचे।
ईवीएम बड़ा खतरा, हाईजेक किया पूरा सिस्टम : रामलाल
हमीरपुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रामलाल ठाकुर ने कहा कि ईवीएम लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बन गई है। उन्होंने कहा कि ईवीएम का पूरा सिस्टम की हाईजेक किया गया है। जो इस चुनाव में हुआ, वह संभव नहीं है।
कांग्रेस के गढ़ों से भी ईवीएम मशीनों की ओर से भाजपा के पक्ष में मतदान किया जा रहा है। रामलाल ठाकुर ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हाई लेवल पर ईवीएम हाईजेक की है। ऐसा संभव नहीं हो सकता कि एक बूथ पर कांग्रेस को 50 और भाजपा के पक्ष में 500 वोट पड़ रहे हैं।
इस बार चुनाव में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के विस क्षेत्रों से भी भाजपा को लीड जा रही है, जो संभव नहीं है। आने वाले समय पर ईवीएम लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बना चुकी है। भाजपा ईवीएम के माध्यम से सभी विरोधियों को ठिकाने लगा रही है।
इससे पहले रामलाल ठाकुर ने बिलासपुर में ही अपने कार्यालय में बैठक कर पार्टी के अन्य नेताओं के साथ टीवी पर लोक सभा चुनाव का परिणाम देखा। उनके साथ पूर्व विधायकों सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
जनादेश स्वीकार, हार के कारणों पर करेंगे मंथन: आश्रय
लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी आश्रय शर्मा ने कहा कि उन्हें जनता का जनादेश स्वीकार है। जनता और कार्यकर्ताओं ने उनके पक्ष में जो कार्य किया है, उसके लिए वे आभारी हैं। कहा कि जल्द हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी।
हार के इतने बड़े अंतर से वह हैरान हैं। उधर, भाजपा की जीत के माहौल में सुखराम परिवार का कोई भी सदस्य घर से बाहर नहीं निकला और दिनभर पूरे परिवार ने घर में ही टीवी पर नतीजे देखे। किसी भी सदस्य ने फोन पर भी किसी से बात नहीं की और मीडिया से भी बचते रहे।
गौर हो कि इस पूरे चुनाव में हुए घटनाक्रम में सबसे अधिक हानि पूर्व मंत्री अनिल शर्मा को उठानी पड़ी है। ऐसे में अब उनका कॅरिअर भी दांव पर लग गया है। इस दौरान धर्मसंकट के चलते जहां उनका मंत्री पद चला गया, वहीं अब उनकी विधायकी पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
रामस्वरूप शर्मा को लीड दिलाने में जहां सभी विधानसभा क्षेत्रों के विधायक मेरिट में आए हैं, वहीं अनिल शर्मा शून्य पर हैं। वह इस प्रकार की स्थिति से गुजरे कि न तो वह पुत्र के लिए प्रचार कर सके और न ही भाजपा के लिए।