चुनावी मौसम में चार गुना बढ़ गई हिमाचली टोपी की डिमांड
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हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा का पर्याय माने जाने वाली हरी और मैरून टोपी की डिमांड चुनावी मौसम में चार गुना तक बढ़ गई है। शिमला के मालरोड स्थित खादी आश्रम और हिमाचल इंपोरियम में हिमाचली टोपियां हाथों हाथ बिक रही हैं। इन दिनों खादी कुर्ता, नेहरू जैकेट और मफलर की भी खासी मांग है।
खादी आश्रम के प्रबंधक गंगाधर सिंह के अनुसार सामान्य दिनों में महीने भर में 100 से 150 टोपियां बिकती हैं लेकिन इन दिनों डिमांड चार गुना बढ़कर 400 से ज्यादा पहुंच गई है। लक्कड़ बाजार स्थित खादी कारखाने में टोपियां बनाने को अतिरिक्त कारीगर लगाने पड़े हैं।
आजकल खादी कुर्ते की भी डिमांड ज्यादा है। हिमाचल इंपोरियम के सहायक प्रबंधक ईश्वर दत्त शर्मा बताते हैं कि पिछले एक हफ्ते से डिमांड दोगुनी हो गई है। पहले रोजाना 8 से 10 टोपियां बिकती थीं इन दिनों 15 से 20 की डिमांड आ रही है। शिमला बुटिको की प्रबंधक नीना ठाकुर ने बताया कि जब भी शिमला में राजनीतिक दलों की बैठक या कोई अन्य कार्यक्रम होता है भारी संख्या में हिमाचली टोपियों की डिमांड आती है। हरी और मैरून 100 टोपियां हमेशा स्टॉक में रखनी पड़ती हैं।
रिज पर आशियाना परिसर में चल रही दीनबंधु कोआपरेटिव सोसायटी की दुकान के सहायक प्रबंधक कृष्ण चंद ने बताया कि चुनावी सीजन में 50 से 60 टोपियों की डिमांड रहती है। सैलानी भी हिमाचली टोपियां खूब पसंद कर रहे हैं।
लोअर बाजार में बिक रही कमल के फूल वाली सदरी
चुनावी मौसम में लोअर बाजार के संसार टेलर ने भाजपा के कमल के फूल की छाप वाली स्पेशल नारंगी सदरी तैयार की है। संचालक संसार कौशल ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से इसके लिए कपड़ा मंगवाया था। अभी दो पीस तैयार किए हैं। एक पीस तो बनते ही लोअर बाजार के ही कारोबारी ने खरीद लिया।
हिमाचल में टोपियों का इतिहास
वीरभद्र सिंह पहली बार 1983 में हिमाचल के मुख्यमंत्री बने। वीरभद्र हरे रंग की बुशैहरी टोपी पहनते हैं। समय के साथ यह टोपी कांग्रेस की पहचान बन गई। 1998 में प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल हिमाचल के मुख्यमंत्री बने। धूमल मैरून रंग की टोपी पहनते हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से मैरून टोपी भाजपा की पहचान बन गई।