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मालरोड पर बजंतरियों ने देवधुनों से किया मंत्रमुग्ध
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रिज पर दिखी देशभर की संस्कृति की झलक
नृत्य प्रतियोगिता में युवाओं ने दिखाई प्रतिभा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव शिमला के दूसरे दिन सोमवार को नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्र प्रतियोगिता हुई। साहित्य उत्सव में देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति की झलक देखने को मिली।
सोमवार को पुलिस रिपोर्टिंग रूम के सामने पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र प्रतियोगिता हुई। बजंतरियों ने एक से बढ़कर एक धुनें बजाकर वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन किया। ढोल-नगाड़े, करनाल और शहनाई वादकों ने न केवल आम लोगों को मंत्रमुग्ध किया बल्कि सैलानियों को भी थिरकने को मजबूर कर दिया। दोपहर करीब दो घंटे तक चली वाद्य यंत्र स्पर्धा में प्रदेश के 10 दलों ने प्रस्तुतियां दीं।
देवी-देवताओं की शान वाद्य यंत्रों से पूरा मालरोड देवमयी हो उठा। दौलत सिंह पार्क में लोगों ने हिमाचली व्यंजनों का लुत्फ उठाया। रितिका, प्रीति, भानु, लक्ष्मी, गौरव, सुरेंद्र, अजय ने बताया कि व्यंजनों के दाम ज्यादा हैं। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कलाकारों ने रिज मैदान पर प्रस्तुति दी। मालरोड, दौलत सिंह पार्क से लेकर लिफ्ट तक बने मंचों पर असम का बिहू, मयूर नृत्य, लावणी नृत्य, राजस्थान और तेलंगाना का लांबड़ी नृत्य हुआ। कंट्रोल रूम के पास रॉक बैंड प्रतियोगिता भी हुई।
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डीसी आदित्य नेगी ने उत्सव में नृत्य प्रतियोगिता में 50, पारंपरिक वाद्य यंत्र प्रतियोगिता में 10 दलों के 120 कलाकारों ने भाग लिया। उत्सव में अन्य विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इसमें लोगों ने भरपूर आनंद लिया। इससे पहले रिज पर डॉग शो के दौरान पुलिस डॉग स्क्वायड के खोजी कुत्तों ने कई हैरतअंगेज करतब दिखाए।
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नृत्य प्रतियोगिता में युवाओं ने दिखाई प्रतिभा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अंतरराष्ट्रीय ग्रीष्मोत्सव शिमला के दूसरे दिन सोमवार को नृत्य और पारंपरिक वाद्य यंत्र प्रतियोगिता हुई। साहित्य उत्सव में देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति की झलक देखने को मिली।
सोमवार को पुलिस रिपोर्टिंग रूम के सामने पारंपरिक लोक वाद्य यंत्र प्रतियोगिता हुई। बजंतरियों ने एक से बढ़कर एक धुनें बजाकर वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन किया। ढोल-नगाड़े, करनाल और शहनाई वादकों ने न केवल आम लोगों को मंत्रमुग्ध किया बल्कि सैलानियों को भी थिरकने को मजबूर कर दिया। दोपहर करीब दो घंटे तक चली वाद्य यंत्र स्पर्धा में प्रदेश के 10 दलों ने प्रस्तुतियां दीं।
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देवी-देवताओं की शान वाद्य यंत्रों से पूरा मालरोड देवमयी हो उठा। दौलत सिंह पार्क में लोगों ने हिमाचली व्यंजनों का लुत्फ उठाया। रितिका, प्रीति, भानु, लक्ष्मी, गौरव, सुरेंद्र, अजय ने बताया कि व्यंजनों के दाम ज्यादा हैं। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के कलाकारों ने रिज मैदान पर प्रस्तुति दी। मालरोड, दौलत सिंह पार्क से लेकर लिफ्ट तक बने मंचों पर असम का बिहू, मयूर नृत्य, लावणी नृत्य, राजस्थान और तेलंगाना का लांबड़ी नृत्य हुआ। कंट्रोल रूम के पास रॉक बैंड प्रतियोगिता भी हुई।
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डीसी आदित्य नेगी ने उत्सव में नृत्य प्रतियोगिता में 50, पारंपरिक वाद्य यंत्र प्रतियोगिता में 10 दलों के 120 कलाकारों ने भाग लिया। उत्सव में अन्य विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इसमें लोगों ने भरपूर आनंद लिया। इससे पहले रिज पर डॉग शो के दौरान पुलिस डॉग स्क्वायड के खोजी कुत्तों ने कई हैरतअंगेज करतब दिखाए।