निगम और बोर्डों में अध्यक्ष -उपाध्यक्ष पद के लिए लाबिंग शुरू
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मंत्रियों को विभाग आवंटित होने के बाद अब निगम और बोर्डों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पद पर तैनाती को लेकर जुगत भिड़ाने का दौर शुरू हो गया है। विधायकों और भाजपा नेताओं ने कुर्सी पाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है। कई भाजपा नेता और विधायक मुख्यमंत्री और मंत्रियों के दरबार में हाजिरी भर रहे हैं तो कई संघ कार्यालय में जुगत भिड़ाने में लगे हैं।
तीन दर्जन से अधिक भाजपा नेताओं ने हिमुडा, बिजली बोर्ड, परिवहन निगम और वन निगम में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन लगने की हामी भरी है तो एचपीएमसी, सिविल सप्लाई और एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन में तैनाती के लिए करीब दो दर्जन नेताओं ने इच्छा जताई है।
पूर्व कांग्रेस सरकार ने निगम और बोर्डों में चेयरमैन और वाइस चेयरमैन की फौज खड़ी की थी। विस चुनाव में हारे नेताओं को भी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बनाया गया था। सरकार में इनकी संख्या 30 से अधिक थी। भाजपा ने विपक्ष में रहते इसका कड़ा विरोध किया था। विधानसभा से लेकर चुनाव तक अध्यक्षों-उपाध्यक्षों के खर्चों का मामला छाया रहा।
करोड़ों के कर्जे में डूबी है सरकार
भाजपा हारे हुए नेताओं की तैनाती के बजाय विधायकों और भाजपा नेताओं को इन पदों पर तैनात कर सकती है। बताया जा रहा है कि निगम और बोर्डों में 10 के करीब अध्यक्ष-उपाध्यक्ष तैनाती किए जाने हैं। सरकार के महत्वपूर्ण निगम और बोर्डों के चेयरमैन मंत्री ही होंगे।
सरकार इस समय 53 हजार करोड़ के कर्जे में डूबी है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान अध्यक्षों-उपाध्यक्षों पर करोड़ों का खर्चा आया है। गाड़ियों से लेकर आवास तक का खर्चा सरकार को वहन करना पड़ा था। ऐसे में भाजपा सरकार निगम और बोर्डों में कम से कम अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की तैनाती करने की योजना बना रही है।