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शिमला: मानवाधिकार आयोग ने आदमखोर तेंदुए के लिए वन विभाग को ठहराया जिम्मेदार
Fri, 12 Nov 2021 10:39 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 12 Nov 2021 10:39 AM IST
सार
राजधानी शिमला के कनलोग क्षेत्र से पांच साल की बच्ची को तेंदुए द्वारा उठाए जाने के मामले में स्वत: संज्ञान लेने के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
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हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश पीएस राणा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश पीएस राणा और सदस्य डॉ. अजय भंडारी की खंडपीठ ने पाया है कि तेंदुआ आदमखोर हो चुका है, इसलिए यह जनसाधारण के जीवन के लिए खतरा बन चुका है। इसके लिए आयोग ने वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया है और जनसाधारण को इस तेंदुए के आतंक से बचाने के निर्देश दिए हैं।
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वन्य जीव और रिहायशी क्षेत्र में एक माह के भीतर सारी झाड़ियां काटने के आदेश जारी किए हैं। इन क्षेत्रों में एक माह के भीतर सुरक्षित बफर जोन स्थापित करने के भी आदेश जारी किए हैं। राजधानी शिमला के कनलोग क्षेत्र से पांच साल की बच्ची को तेंदुए द्वारा उठाए जाने के मामले में स्वत: संज्ञान लेने के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने वन विभाग को निर्देश दिए हैं कि तेंदुए को तुरंत जिंदा पकड़ा जाए। उसे उसके पूरे जीवन तक पिंजरे में रखा जाए। अगर तेंदुआ पकड़ा नहीं जा सकता है तो उस स्थिति में उसे तुरंत मारा जाए।
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आयोग ने वन्य जीव और आवासीय मानव कॉलोनी क्षेत्र में एक माह के भीतर तारों की फेंसिग करने के आदेश जारी किए हैं। शिमला वन क्षेत्र में रहने वाले तेंदुओं की लोकेशन के बाद एक माह के भीतर टैग लगाने के आदेश जारी किए हैं। आयोग ने वन विभाग को अपने आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए अनुपालना रिपोर्ट एक माह के भीतर दाखिल करने के आदेश जारी किए हैं।
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