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Shimla News: एडवांस्ड स्टडी भवन का विधिक प्राधिकरण सचिव ने किया निरीक्षण
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भवन के रखरखाव की व्यवस्था का जांचा
19 मार्च से पहले हाईकोर्ट में पेश की जाएगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर वीरवार को एडवांस्ड स्टडी भवन का न्यायिक निरीक्षण किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिमला के सचिव ने परिसर पहुंचकर विरासत भवन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।
पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुए निरीक्षण में मुख्य भवन की बाहरी संरचना, पत्थर की दीवारों की स्थिति, छत और जल निकासी व्यवस्था की जांच की गई। सचिव ने लॉन, उद्यानों, पैदल मार्गों, पर्यटक प्रवेश क्षेत्र, सुरक्षा व्यवस्था और सफाई प्रबंधन का भी निरीक्षण किया। भवन के बाहरी हिस्सों पर संरक्षण कार्य, रंग-रोगन की स्थिति और ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने के उपायों की जानकारी ली गई। निरीक्षण के दौरान संस्थान प्रशासन के अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के प्रतिनिधि और रखरखाव से जुड़े कर्मचारी उपस्थित रहे।
सचिव ने संबंधित अधिकारियों से रखरखाव बजट, नियमित देखरेख की व्यवस्था और हाल में करवाए मरम्मत कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की। यह कार्रवाई हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका के संदर्भ में की गई है। अदालत में यह मुद्दा उठाया गया था कि राष्ट्रीय महत्व की इस विरासत इमारत के लॉन और बाहरी हिस्सों का रखरखाव अपेक्षित स्तर का नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की रिपोर्ट 19 मार्च को निर्धारित अगली सुनवाई से पहले उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी। केंद्र सरकार और संस्थान के निदेशक को भी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। शिमला की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े इस भवन को लेकर न्यायालय की निगरानी में हुई यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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19 मार्च से पहले हाईकोर्ट में पेश की जाएगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर वीरवार को एडवांस्ड स्टडी भवन का न्यायिक निरीक्षण किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिमला के सचिव ने परिसर पहुंचकर विरासत भवन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।
पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुए निरीक्षण में मुख्य भवन की बाहरी संरचना, पत्थर की दीवारों की स्थिति, छत और जल निकासी व्यवस्था की जांच की गई। सचिव ने लॉन, उद्यानों, पैदल मार्गों, पर्यटक प्रवेश क्षेत्र, सुरक्षा व्यवस्था और सफाई प्रबंधन का भी निरीक्षण किया। भवन के बाहरी हिस्सों पर संरक्षण कार्य, रंग-रोगन की स्थिति और ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखने के उपायों की जानकारी ली गई। निरीक्षण के दौरान संस्थान प्रशासन के अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के प्रतिनिधि और रखरखाव से जुड़े कर्मचारी उपस्थित रहे।
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सचिव ने संबंधित अधिकारियों से रखरखाव बजट, नियमित देखरेख की व्यवस्था और हाल में करवाए मरम्मत कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की। यह कार्रवाई हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका के संदर्भ में की गई है। अदालत में यह मुद्दा उठाया गया था कि राष्ट्रीय महत्व की इस विरासत इमारत के लॉन और बाहरी हिस्सों का रखरखाव अपेक्षित स्तर का नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की रिपोर्ट 19 मार्च को निर्धारित अगली सुनवाई से पहले उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी। केंद्र सरकार और संस्थान के निदेशक को भी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। शिमला की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े इस भवन को लेकर न्यायालय की निगरानी में हुई यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।