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Shimla News: गेयटी में नदी-रंग जैसी लड़की की आलोचना कृति का लोकार्पण
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साहित्यकारों ने उपन्यास को बताया पर्यावरणीय चिंता
कथाकार एसआर हरनोट का चर्चित उपन्यास है नदी-रंग जैसी लड़की
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर सभागार में शुक्रवार को कथाकार एसआर हरनोट के चर्चित उपन्यास नदी-रंग जैसी लड़की पर केंद्रित आलोचना कृति का लोकार्पण किया गया। न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन दिल्ली से प्रकाशित और डॉ. राजेंद्र बड़गूजर द्वारा संपादित इस कृति का लोकार्पण डॉ. राजेंद्र बड़गूजर, वरिष्ठ कवि-आलोचक राकेशरेणु, साहित्य मर्मज्ञ जय प्रकाश पांडेय और प्रकाशक एमएम चंद्रा ने किया। इस दौरान कृति के संपादक डॉ. राजेंद्र बड़गूजर ने कहा कि पुस्तक की परिकल्पना उन्होंने शिमला स्थित उच्च अध्ययन संस्थान में फेलो रहते हुए की थी।
इसमें अब्दुल बिस्मिल्लाह, सूरज पालीवाल, साधना अग्रवाल, राकेशरेणु, हेमराज कौशिक, जय प्रकाश पांडेय, गीताश्री और प्रशांत रमण रवि सहित देश के कई प्रमुख आलोचकों के आलेख शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उपन्यास पहाड़ी जीवन की लोक-संस्कृति के साथ नदी और स्त्री की अदम्य जिजीविषा तथा पर्यावरण को पहुंच रहे नुकसान को प्रभावी ढंग से सामने लाता है। वरिष्ठ कवि-आलोचक राकेशरेणु ने कहा कि हिडिम्ब के बाद हरनोट का यह दूसरा महत्वपूर्ण उपन्यास है, जिसमें पर्यावरणीय चिंताएं प्रमुखता से उभरती हैं। जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि उपन्यास की नायिका सुनमा दादी का जीवन तथाकथित विकास की नकारात्मक और अमानवीय भूमिका को उजागर करता है। इस अवसर पर हिमालय साहित्य, संस्कृति व पर्यावरण मंच की ओर से आयोजित समारोह में लेखक एसआर हरनोट के अलावा डॉ. हेमराज कौशिक, प्रो. मीनाक्षी एफ. पॉल, जगदीश बाली, डॉ. प्रशांत रमण रवि, अभिषेक तिवारी और डॉ. दिनेश शर्मा मौजूद रहे।
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कथाकार एसआर हरनोट का चर्चित उपन्यास है नदी-रंग जैसी लड़की
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर सभागार में शुक्रवार को कथाकार एसआर हरनोट के चर्चित उपन्यास नदी-रंग जैसी लड़की पर केंद्रित आलोचना कृति का लोकार्पण किया गया। न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन दिल्ली से प्रकाशित और डॉ. राजेंद्र बड़गूजर द्वारा संपादित इस कृति का लोकार्पण डॉ. राजेंद्र बड़गूजर, वरिष्ठ कवि-आलोचक राकेशरेणु, साहित्य मर्मज्ञ जय प्रकाश पांडेय और प्रकाशक एमएम चंद्रा ने किया। इस दौरान कृति के संपादक डॉ. राजेंद्र बड़गूजर ने कहा कि पुस्तक की परिकल्पना उन्होंने शिमला स्थित उच्च अध्ययन संस्थान में फेलो रहते हुए की थी।
इसमें अब्दुल बिस्मिल्लाह, सूरज पालीवाल, साधना अग्रवाल, राकेशरेणु, हेमराज कौशिक, जय प्रकाश पांडेय, गीताश्री और प्रशांत रमण रवि सहित देश के कई प्रमुख आलोचकों के आलेख शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उपन्यास पहाड़ी जीवन की लोक-संस्कृति के साथ नदी और स्त्री की अदम्य जिजीविषा तथा पर्यावरण को पहुंच रहे नुकसान को प्रभावी ढंग से सामने लाता है। वरिष्ठ कवि-आलोचक राकेशरेणु ने कहा कि हिडिम्ब के बाद हरनोट का यह दूसरा महत्वपूर्ण उपन्यास है, जिसमें पर्यावरणीय चिंताएं प्रमुखता से उभरती हैं। जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि उपन्यास की नायिका सुनमा दादी का जीवन तथाकथित विकास की नकारात्मक और अमानवीय भूमिका को उजागर करता है। इस अवसर पर हिमालय साहित्य, संस्कृति व पर्यावरण मंच की ओर से आयोजित समारोह में लेखक एसआर हरनोट के अलावा डॉ. हेमराज कौशिक, प्रो. मीनाक्षी एफ. पॉल, जगदीश बाली, डॉ. प्रशांत रमण रवि, अभिषेक तिवारी और डॉ. दिनेश शर्मा मौजूद रहे।
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