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HP Weather: मलाणा नाला में बाढ़ आने से दो पैदल पुल, कई गाड़ियां बहीं, 404 सड़कें बाधित, ऊना-चंबा में भी तबाही

Sat, 02 Aug 2025 10:21 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 02 Aug 2025 10:21 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के कई भागों में बीती रात भारी बारिश दर्ज गई की। इससे जगह-जगह भूस्खलन व जलभराव हो गया। ऊना में 222.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जोकि सामान्य से बहुत अधिक है।

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landslide on the Chandigarh-Manali nh at Kainchi Mor, school closed in una today due to heavy rainfall
हिमाचल में भारी बारिश ने बरपाया कहर मलाणा नाला में आई बाढ़। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के कई भागों में बीती रात भारी बारिश दर्ज गई की। इससे जगह-जगह भूस्खलन व जलभराव हो गया। राज्य में शनिवार शाम तक एक एनएच सहित 404 सड़कें बाधित रहीं। 411 बिजली ट्रांसफार्मर व 196 जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हैं। बीती रात ऊना में 222.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जोकि सामान्य से बहुत अधिक है। इसी तरह जोत में 157.8, नंगल डैम  145.0, बिलासपुर 120.8, भटियात  96.0, ओलिंडा 78.0, नादौन 73.6, बरठीं 69.6, सुजानपुर टिहरा 68.4, देहरा गोपीपुर 67.2, चंबा 66.0, धर्मशाला 64.0, नाहन 64.0 62.3, रायपुर मैदान 61.8, संधोल 61.2,  भराड़ी और बीबीएमबी में 48.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। उधर, चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर मंडी-कुल्लू मार्ग के बीच स्थित पंडोह डैम से आगे कैंची मोड़ पर शनिवार सुबह करीब 4:00 बजे भारी भूस्खलन के चलते चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पूरी तरह से बंद हो गया।

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बड़े-बड़े पत्थर और मलबा सड़क पर गिर गया, जिससे राजमार्ग का एक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और सतह पर दरारें दिखाई देने लगीं।  लगभग पांच घंटे बाद इसे आवाजाही के लिए खोला गया।  शुक्रवार को भी नौ घंटे की मशक्कत के बाद हाईवे बहाल किया गया।  यह मार्ग दोबारा शनिवार सुबह चट्टानें और मलबा आने के कारण अवरुद्ध हो गया। इस भूस्खलन के कारण न केवल हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया था, बल्कि कुल्लू से नूरपुर जा रहा एक शव वाहन भी कैंची मोड़ के पास फंस गया था। वाहन चालक रूप लाल ने बताया कि वह सुबह 4:00 बजे से रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे थे,  एनएचएआई की मशीनरी लगभग सुबह 9:00 बजे मौके पर पहुंची और रास्ता बहाल हुआ।
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शिवाबदार गांव को जोड़ने वाला वैकल्पिक रास्ता पहले ही टूट चुका है और अब दोबारा भूस्खलन के कारण यह मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया है। गांव का संपर्क लगातार दूसरे दिन भी पूरी तरह कटा हुआ है। स्थानीय लोगों और फंसे यात्रियों का आरोप है कि लगभग पांच घंटे बीत जाने के बाद मलबा हटाने की मशीनें साइट पर पहुंचीं और न ही कोई एनएचएआई का अधिकारी मौके पर पहुंचा था। सिर्फ पुलिस कर्मचारी माैके पर थे। इससे हाईवे पर फंसे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कटोला-बजौरा जैसे वैकल्पिक मार्गों से कुछ छोटे वाहन निकाले जा रहे हैं, लेकिन भूस्खलन की आशंका के चलते वह रास्ता भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा रहा। 

ऊना में मूसलाधार बारिश का कहर, जगह-जगह जलभराव
वहीं,  शुक्रवार देर रात हुई बारिश से ऊना में हालत खराब हो गए हैं। शहर में जगह-जगह जलभराव की स्थिति बन गई है। इस दौरान डीएफओ रेजिडेंस में भी पानी घुस गया।  इसके अलावा चंडीगढ़-धर्मशाला नेशनल हाईवे  में भी जगह-जगह जलभराव हुआ है। ऐसे में वाहन चालकों में स्थानीय दुकानदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि सड़कों पर दो से तीन फीट पानी जमा हो गया। नजदीक पतंजलि स्टोर के पीछे की दीवार के घरों में 10 फीट पानी जमा हुआ है। जान बचाने के लिए लोग छतों पर चढ़ गए। 

ऊना में बंद रहे सभी शिक्षण संस्थान
जिला ऊना में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते 2 अगस्त को सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। जिला दंडाधिकारी जतिन लाल ने बताया कि पिछले 12 घंटों से हो रही लगातार बारिश के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव और सड़कों के अवरुद्ध होने की स्थिति बन गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। जिला दंडाधिकारी ने संबंधित संस्थानों के प्रमुखों को आदेशों की अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष के टोल-फ्री नंबर 1077 पर संपर्क करें और खड्डों व नदियों के किनारे जाने से बचें।

भारी बारिश से बरनोह गांव में जलभराव, ईंट भट्ठे के पास फंसे पिता-पुत्र
भारी बारिश के चलते ऊना जिला मुख्यालय के साथ लगते बरनोह गांव में एक प्रवासी मजदूर अपने बेटे संग फंस गया। प्रवासी पिछले लंबे समय से बरनोह स्थित एक ईंट भट्ठे में कार्यरत हैं। शुक्रवार रात से तेज बारिश के बाद भट्ठे के आसपास पानी भर गया। ऐसे में प्रवासी मजदूर भी जलभराव के चलते फंस गया। वहीं बाढ़ जैसी स्थिति के कारण उद्योग विभाग कॉलोनी, पुरानी आईटीआई और डीआईसी कार्यालय में भारी नुकसान हुआ है।

चंबा में भी सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र आज बंद
चंबा जिले में मूसलाधार बारिश के चलते शनिवार को सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने के आदेश जिला प्रशासन ने जारी किए हैं। मूसलाधार बारिश से भरमौर-पठानकोट एनएच जांघी के समीप भारी भूस्खलन के चलते यातायात के लिए बाधित है।  वहीं जिले में 75 मार्ग,188 ट्रांसफार्मर और 80 पेयजल योजनाएं बारिश से प्रभावित हुई हैं। जिला का विधानसभा क्षेत्र भटियात पूरी तरह से पड़ोसी जिला कांगड़ा और जिला मुख्यालय से कट चुका है। कालीधार के पास सड़क धंसने और भारी भूस्खलन से सड़क का क्षतिग्रस्त होना इसकी मुख्य वजह है। चंबा-तीसा मुख्य मार्ग पर कॉलोनी मोड़ के समीप भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से बार-बार भूस्खलन हो रहा है। मौके पर मशीन मौजूद है, बार-बार मलवा हटाना पड़ रहा है। फिलहाल यहां पर मार्ग सुचारु कर दिया है।

 मलाणा नाला में बाढ़ आने दो पैदल पुल, कई मशीनें और गाड़ियां बहीं
भारी बारिश के चलते मलाणा नाला में बाढ़ आ गई है। इससे क्षेत्र में व्यापक नुकसान हुआ है। घाटी के मलाणा एक हाइड्रो पावर कंपनी की ओर से बनाया गया एक अस्थायी बांध अचानक आई बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। इससे एक हाइड्रा, डंपर, रॉक ब्रेकर, कैंपर और कार बह गई। उपायुक्त कुल्लू तोरुल एस रवीश ने कहा कि इस घटना में कोई जन हानि की सूचना नहीं है।  लगातार बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण पार्वती नदी का जलस्तर बढ़ गया है। बाढ़ आने से मलाणा गांव के लिए बना पैदल पुल बह गया है और इसके साथ ही घाटी के पोहल गांव को जोड़ने वाला पुल भी बह गया है। दोनों पैदल पुल के बह जाने से ऐतिहासिक गांव मलाणा के साथ पोहल गांव वासियों का संपर्क कट गया है। इसके साथ ही पोहल, बलाधी सहित अन्य गांव के लोगों की जमीन को भी नुकसान पहुंचा है।

चताड़ा में भारी बारिश से महादेव पेपर ट्यूब फैक्टरी में घुसा पानी
 जिला ऊना  में लगातार हो रही भारी बारिश से चताड़ा में बाबा दयाल दास मंदिर के नजदीक महादेव पेपर ट्यूब फैक्टरी को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारी बारिश के कारण फैक्टरी परिसर में पानी घुस गया है, जिससे वहां रखे कच्चे माल, तैयार उत्पाद और महंगी मशीनरी को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। फैक्टरी के समीप भूस्खलन भी हुआ है। इससे फैक्टरी तक पहुंचने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया है। क्षेत्र में लगातार बारिश के चलते अन्य छोटे-बड़े उद्योगों और किसानों को भी नुकसान की आशंका बनी हुई है। खेतों में पानी भरने और संपर्क मार्गों के अवरुद्ध होने से जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

पौंग बांध का जलस्तर खतरे के निशान के करीब
 लगातार हो रही बारिश के कारण पौंग बांध का जलस्तर शनिवार को 1362 फीट तक पहुंच गया। यह स्तर खतरे के निशान 1365 फीट से मात्र तीन फीट नीचे है। ऐसे में डैम प्रबंधन किसी भी वक्त पानी छोड़ सकता है। पानी निचले इलाकों में तबाही मचा सकता है।  स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है और आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी टीमें अलर्ट पर रखी गई हैं।  बीबीएमबी ने इंदौरा में बांध से सटे क्षेत्रों में लाउडस्पीकर से सतर्क रहने को कह रहा है। इंदौरा, मंड और मियाणी क्षेत्रों में बांध से छोड़े पानी का प्रकोप रहता है।  बीबीएमबी ने अर्ली वार्निंग सिस्टम से लोगों को सचेत किया गया है।  दस बजे के आंकड़ों के अनुसार जलस्तर 1362 फीट से ऊपर पहुंच चुका था। भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड सायरन बजाकर बांध से सटे गांव के लोगों को सचेत कर रहा है। 

 

 लगघाटी की दड़का-भूमतीर सड़क बंद, भारी बारिश से नाले में हुई तब्दील
 जिला मुख्यालय कुल्लू के साथ सटी लगघाटी की दड़का-भूमतीर सड़क पर वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। भारी बारिश के कारण सड़क नाले में तब्दील हो गई है। सड़क पर पानी और मलबा बह रहा है। इसके अलावा कई स्थानों पर सड़क भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीणों की सड़क बंद होने से परेशानी बढ़ी है।  वहीं ऊना के वार्ड नंबर पांच के कई घरों में बारिश का पानी घुसने से भारी नुकसान हुआ है।

इतने दिन बरसेंगे बादल, कई भागों में भारी बारिश का अलर्ट
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला ने राज्य के कई भागों में 8 अगस्त तक बारिश का दाैर जारी रहने का पूर्वानुमान जताया है। 2, 4 व 5 अगस्त को मंडी, बिलासपुर, सोलन व सिरमाैर, ऊना, कांगड़ा, कुल्लू जिले में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। 3 व 6 अगस्त को कुछ स्थानों के लिए येलो अलर्ट है।  प्रदेश में इस मानसून सीजन में 20 जून से 2 अगस्त तक 179 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 289 लोग घायल हुए हैं। 36 लोग अभी भी लापता हैं। इस दाैरान 78 लोगों की सड़क हादसों में माैत हुई है। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ से अब तक 1,896 कच्चे-पक्के घरों, दुकानों को क्षति हुई है। 1,445 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,533 पालतु पशुओं की माैत हुई है। नुकसान का कुल आंकड़ा 1,69,209.23 लाख रुपये पहुंच गया है।

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