लाहौल: बाढ़ के बाद करपट गांव किया खाली, 22 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर ठहराया
जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति की मयाड़ घाटी में मंगलवार शाम आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया।
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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति की मयाड़ घाटी में मंगलवार शाम आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। करपट, चांगुट, उरगोस, तिंगरेट और शकोली गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों में दहशत का माहौल है। बाढ़ के बाद लाहौल में करपट गांव को खाली कर दिया गया है। सभी 22 प्रभावित परिवारों को प्रशासन ने सुरक्षित स्थान पर ठहराया दिया है। बाढ़ से पांच मकानों में मलबा घुस गया था। जबकि कुछ मकानों में हल्की दरारें भी आ गई हैं। वहीं 22 परिवारों की सुरक्षित स्थान पर टेटों में रात कटी। गौर रहे कि 20 से अधिक बीघा भूमि मलबे में दब गई है। खेतों में खड़ी फसलें बाढ़ की चपेट में आने से तबाह हो गईं। मंगलवार को आई बाढ़ से तीन पुल बह गए थे।
उधर, पट्टन क्षेत्र के चोखंग-नेनगाहर संपर्क सड़क और कई आंतरिक मार्ग भी बाढ़ की चपेट में आकर बह गए, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया। बुधवार को उपमंडल कार्यालय उदयपुर की टीम, लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। करपट गांव के प्रभावित लोगों को राशन व जरूरी सामान उपलब्ध करवाया गया। इसके साथ ही सड़कों और पुलों की बहाली का काम शुरू कर दिया गया है। लाहौल-स्पीति विधायक अनुराधा राणा ने बाढ़ को गंभीर आपदा बताते हुए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की बात कही। उन्होंने प्रशासन को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आंकलन करने को भी कहा। भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने प्रशासन से राहत कार्य तेज करने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
क्या कहते हैं अधिकारी
बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन जारी है। प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद दी जा रही है। राजस्व विभाग नुकसान का जायजा ले रहा है। प्रभावित परिवारों को राशन व जरूरी सामान करवाया गया है। -किरण भडाना, उपायुक्त, लाहौल-स्पीति।