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Himachal: मन की आंखों से कर ली कानून की पढ़ाई, हिमाचल के पहले नेत्रहीन वकील बने लग्नेश

Sat, 07 Feb 2026 10:42 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, घुमारवीं (बिलासपुर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, घुमारवीं (बिलासपुर)। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 07 Feb 2026 10:42 AM IST
सार

विपरीत परिस्थितियों और शारीरिक चुनौती को मात देकर कानून की पढ़ाई कर लग्नेश हिमाचल के पहले नेत्रहीन अधिवक्ता बने हैं।

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Lagnesh studied law with the eyes of his mind, becoming Himachal Pradesh's first visually impaired lawyer
लग्नेश हिमाचल के पहले नेत्रहीन अधिवक्ता बने। - फोटो : संवाद

विस्तार

मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है घुमारवीं उपमंडल के बरोटा गांव के लग्नेश कुमार ने। विपरीत परिस्थितियों और शारीरिक चुनौती को मात देकर कानून की पढ़ाई कर लग्नेश हिमाचल के पहले नेत्रहीन अधिवक्ता बने हैं। वह घुमारवीं सिविल कोर्ट में न केवल वकालत कर रहे हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा बनकर भी उभरे हैं। वर्ष 2009 में सामान्य से दिखने वाले आंखों के संक्रमण ने धीरे-धीरे उनकी दुनिया में अंधेरा भर दिया। बड़े अस्पतालों तक इलाज करवाया गया, लेकिन फिर भी 33 वर्षीय लग्नेश ने आंखों की रोशनी पूरी तरह खो दी। पिता के निधन के बाद घर की आर्थिक स्थिति भी डांवांडोल थी। माता आंगनबाड़ी में हेल्पर के रूप में काम कर घर का गुजारा कर रही थीं, लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। 

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लग्नेश ने 2016 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद कानून की पढ़ाई का मन बनाया। संसाधनों की कमी के बीच केके फाउंडेशन ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और आर्थिक मदद की। लग्नेश ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान दिल्ली विश्वविद्यालय (कैंपस लॉ सेंटर) से 2020 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। लग्नेश के संघर्ष का ही असर था कि बार काउंसिल ऑफ हिमाचल प्रदेश को अपने नियमों में बदलाव करना पड़ा। आर्थिक स्थिति और लगन को देखते हुए बार काउंसिल ने न केवल उनका पंजीकरण किया, बल्कि भविष्य के लिए नीति बनाई कि किसी भी दिव्यांग अधिवक्ता से पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा। 

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